डा प्रणय तिवारी: मानवाधिकार कार्यकर्ता शासन किस प्रकार से अपना कार्य कर रही है,सीधे देख लीजिए

डा प्रणय तिवारी: मानवाधिकार कार्यकर्ता
शासन किस प्रकार से अपना कार्य कर रही है,सीधे देख लीजिए,खाने के पैकेट,पानी पिलाने के प्यऊ वाले भी पढ़ ले कि यह खाना और पानी आता कहा से है, और भूख से बिलख बिलख कर जब कोई अपने प्राण त्याग देता है,तो क्यो त्याग देता है,
धर्म है,कि जियो और जीने दो ,परंतु यहा तो कौन जीने का प्रयास कर रहा है,ना कोई समझने वाला बचा है ना समझाने वाला।
नदियो का उत्खनन अपनी चरम सीमा को लाघ चुका है,जलीय जीव जन्तु की, मरती हुई चीत्कार सुनाई दे रही है,तृहिमाम की स्थिति निर्मित कर दी गयी है, मानो कानून-व्यवस्था की स्थिति चौपट हो गयी है ।
जब सीधे सीधे गलत दिखाई दे रहा है,तो उसे रोक देने मे सक्षम शक्तियां क्या कर रही है ?
हसी आती है ,यह सोचकर कि शमशान घाट तक ले जाने के लिये चार कन्धे भी मिल पाएगे या नहीं ।
पर नहीं हम नहीं समझेगे,हमारा सरवनाश जो करीब आ चुका है।
जो बोले उसे तौला दो और ना माने तो खौला दो।
आप अपनी अपराधिक गतिविधियों को अपने तक ही सीमित रखिए,प्राण भक्षियो ,वैसे भी विनाशकाले विपरीत बुद्धि हो ही जाती है।
कुछ भी हो समस्या है,तो समाधान भी अवश्य है,यदि रात्रि हुई है तो विहान भी होगा।

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