*जनपद कुसमी में सौर ऊर्जा में हुआ करोड़ो का घोटाला*

*जनपद कुसमी में सौर ऊर्जा में हुआ करोड़ो का घोटाला*

*- जिला पंचायत में लंबित है जांच का प्रकरण, दबाई गई है फाईलें*

मध्य प्रदेश जिला सीधी। जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र कुसमी जनपद में सौर ऊर्जा के नाम पर करीब 8 करोड़ का घोटाला सामने आया है। जिसकी फाईल जिला पंचायत में अभी भी दवाकर रखी गई है। मामले में जिम्मेदार अधिकारी संबंधितों के खिलाफ कार्यवाही करने से परहेज कर रहे हैं। वहीं निर्माण कार्य के नाम पर भी चिन्हित दुकानदारों के नाम लाखों का भुगतान की शिकायत भी जिला पंचायत में की जा चुकी है। ऐसे में जिम्मेदार अधिकारी मामले को लेकर निष्पक्ष जांच करेंगे तो सच्चाई का पर्दाफाश सामने आ सकता है।
ज्ञात हो कि जनपद पंचायत कुसमी में पदस्थ रहे सीईओ श्रीनिवास दुबे दो वर्ष पहले भ्रष्टाचार को जामा पहनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उनके द्वारा सौर ऊर्जा के नाम पर भी करोड़ो का घोटाला किया गया है। इतना ही नहीं सीईओ श्री द्विवेदी ने चहेतो को सौर ऊर्जा का काम देकर बिना काम किये भुगतान चहेतो को कराने में भी चर्चित माने जा रहे हैं। इसकी शिकायत जिला पंचायत में संबंधित शाखा के पास अभी भी लंबित है। हाल में ही शाखा के प्रभारी रामसखा के निलंबन एवं एफआईआर की वजह से फाईल वहां दबी हुई है। ऐसी स्थिति में जिन लोगों को सौर ऊर्जा का काम मिला था उन्होने बिना काम किए आदिवासी बहुल्य क्षेत्र की जनता के साथ अन्याय किये हैं। लोगों को गुमराह कर सौर ऊर्जा के नाम पर बिना काम किये भुगतान भी आहरित कर लिए हैं। जिस वजह से इस मामले में करीब आधा दर्जन लोगों के शामिल होने की जानकारी होने पर जिला पंचायत सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों तक शिकायत की जा चुकी है। संयोग था कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आने के बाद शिकायत के फाईले तो जांच के लिए शुरू हुईं परन्तु फिर सरकार गिर गई जिस वजह से सत्ता में भाजपा की सरकार संबंधितों के खिलाफ कार्यवाही से परहेज कर रहा है। वहीं पूर्व में ही जनपद सीईओ रहे श्री द्विवेदी द्वारा लाखों का निर्माण कार्य कराया गया जिसमें की लकी ट्रेडर्स के नाम पर ही सर्वाधिक भुगतान होना पाया जा रहा है जबकि सौर ऊर्जा का भुगतान कुसमी में कम लेकिन सीधी जनपद पंचायत के पास स्थित एक कम्प्यूटर सेंटर में सर्वाधिक भुगतान होना माना जा रहा है। वास्तविकता क्या है यह तो जांच का विषय है लेकिन कही न कहीं सौर ऊर्जा के नाम पर हुए करोड़ों के घोटाले की फाईलें अभी भी दबी हुईं हैं।

*कांग्रेसी मामले को लेकर साधे हैं चुप्पी*
विपक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जिले के कांगे्रसी भ्रष्टाचार को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाने से परहेज कर रहे हैं। स्थिति यह है कि सौर ऊर्जा के नाम पर ही करोड़ों का घोटाला होने के बाद भी कांग्रेसी मौन साधे हुए हैं। जनपद सीईओ कुसमी पहले पदस्थ थे सरकार भाजपा की आने के बाद फिर पदस्थ हो गए हैं जो कि पंचायतों में भ्रष्टाचार का जामा पहनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इन सबके बावजूद भी कांग्रेसियों की हिम्मत सीईओ के खिलाफ आवाज उठाने की नहीं उठ रही है।

शौंचालय निर्माण पर भी हुआ लाखों का वारा-न्यारा
स्वच्छता अभियान को लेकर वाहवाही लूटने वाले जनपद पंचायत कुसमी के सीईओ की जांच की जाये तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी कि शौंचालय निर्माण पर उनके द्वारा लाखों का वारा-न्यारा किया जा चुका है। अभियान को लेकर प्रमाण पत्र तो उन्हे हासिल हो गए लेकिन जमीनी हकीकत देखा जाए तो आदिवासी क्षेत्र में दस फीसदी भी शौंचालय काम लायक नहीं हैं जो बने भी हैं उनमे गुणवत्ता की अनदेखी की गई है वहीं अधिकतर घरो में शौंचालय आज भी नहीं बन पाए हैं लेकिन तत्कालीन कलेक्टर चहेते बनकर सीईओ ने स्वच्छता अभियान शत-प्रतिशत पूरा होने का प्रमाण पत्र हासिल कर लिए हैं।
विधायक के संरक्षण में चल रहा मनमानी कार्य
जनपद पंचायत कुसमी में सीईओ एसएन द्विवेदी इसके पहले भी पदस्थ थे फिर वे अब सीईओ बतौर पदस्थ हैं। यहां तक की भ्रष्टाचार के बाद विधायक कुंवर सिंह टेकाम की मेहरबानी की वजह से उन्हे मझौली जनपद का भी अतिरिक्त प्रभार सौप दिया गया है। जो कि पंचायतों में निर्माण कार्यों के नाम पर सरपंच एवं सचिवों से सुविधा शुल्क लेने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ऐसे सीईओ के खिलाफ कार्यवाही की आवाज उठाने की हिम्मत विपक्ष पार्टी के नेताओं की नही जुट रही है।
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