*हम तो पूँछेंगे कलम की धार से- रोहित मिश्रा*

*हम तो पूँछेंगे कलम की धार से- रोहित मिश्रा*

【1】 *क्या मिलावट से हो रहीं जन हानि के असली दोषी हैं खाद्य अधिकारी*

【2】 *क्या झोलाछाप चिकित्सकों के विरुद्ध कार्यवाही से सुधर जाएगी जिले की स्वास्थ्य ब्यवस्था*?

【3】 *क्या जिलापंचायत प्रशासनिक तौर पर हो गयी बेलगाम*?

मध्य प्रदेश जिला सीधी आज रविवार है और हम अपनी खास पेशकस *हम तो पूँछेंगे कलम की धार से* लेकर पुनः आप सबके समक्ष हाजिर हैं आज पहला सवाल पूँछ रहे हैं *क्या मिलावट से हो रही जन हानि के असली दोषी हैं खाद्य अधिकारी और जिला प्रशासन* सवाल आवश्यक भी है क्योंकि पूरा शहर जहर पी रहा अब इससे बड़ा प्रमाण क्या हो सकता है कि जन बेमौत मरने लगे हैं। अपने पिछले अंक में मैंने इस बात को जिला प्रशासन एवं शहर के आम जनमानस के समक्ष रखा था इस हफ्ते प्रशासन ने मिलावटखोरों के विरुद्ध कार्यवाही करने की योजना भी बनाई कई जगह राजस्व और खाद्य अधिकारियों ने छापे मार कार्यवाही भी किया कार्यवाही के दौरान कुछ दुकानों पर एक्सपायरी डेट की सामग्री भी मिली लेकिन या तो प्रशासन को यह पता नहीं है कि मिलावटखोरों और गुणवत्ता विहीन सामग्री वितरित करने वाले दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही किस नियम और पद्धत से की जानी चाहिए अथवा तात्कालिक बाद अपने ही अधिकारी कर्तव्य से विमुख हो जाता है जिला प्रशासन यह बात कटु सत्य है कि पूरे जिले भर में सुबह-सुबह दुग्ध विक्रेताओं द्वारा जहर पिलाया जा रहा है ऐसा इसलिए कह रहा हूं कि कोविड-19 के इस महामारी में भी गंदे पानी से लवरेज दूध पीने को विवश है शहर की जनता इसके अलावा होटल संचालकों द्वारा मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों में जमकर मिलावट की जा रही है डेयरी संचालक मिलावट से चूकते नहीं कुल मिलाकर खाद्य सामग्री मिलावट से दूर हो इस दिशा में जिला प्रशासन मात्र खानापूर्ति करता है और आम जनमानस की जीवन प्रत्याशा लगातार घटती जा रही है कई जगह मृत्यु की खबरें आम सी हो गई हैं बात तो मिलावट की है चाहे वह किसी भी बीमारी का रूप ले ले परिवार के सदस्य इस मिलावट से अस्वस्थ हो जाते हैं तो महानतम शहर में स्वास्थ्य की देखभाल करने वाले चिकित्सक तक नसीब नहीं होते खैर करुणा भवन में बैठे जिम्मेदार अधिकारी मिलावट की जड़ से जिले वासियों को नहीं बचा पा रहे हैं यह बहुत दुखद है।

【2】 *क्या झोलाछाप चिकित्सकों के विरुद्ध कार्यवाही से सुधर जाएगी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था*

कुछ दिन पूर्व झोलाछाप चिकित्सकों के विरुद्ध प्रशासन द्वारा कार्यवाही की गई कार्यवाही इसलिए कि संदेह पूर्ण चिकित्सा झोला छाप चिकित्सकों द्वारा की गई बिल्कुल ऐसे चिकित्सकों के विरुद्ध कार्यवाही होनी चाहिए जो झोला लेकर आम जनमानस को प्राथमिक उपचार प्रदान करते हैं यहां तक प्रशासन को नियम कानून समझ में आ गया लेकिन इसके अतिरिक्त जिला प्रशासन को यह पता नहीं है कि ग्रामीण अंचल में किसी को प्राथमिक उपचार करानी हो तो शहर आते आते वह व्यक्ति मृत्यु के सैया पर चढ़ जाएगा और अगर किसी तरह बचा भी रहा तो जिला चिकित्सालय पहुंचकर यहां के हिटलर चिकित्सकों से तो बिल्कुल नहीं बच पाएगा जब यहां स्वास्थ्य की बदहाल व्यवस्था है तब झोलाछाप चिकित्सकों के विरुद्ध कार्यवाही कैसी ग्रामीण अंचलों में उप स्वास्थ्य केंद्रों के कभी ताला नहीं खुलता ग्राम वासियों स्वास्थ्य का प्रथम उपचार इन्ही झोलाछाप चिकित्सकों के द्वारा ही किया जाता है बाकी मौत तो कब्रिस्तान की तरह जिला चिकित्सालय में भी होती है मतलब हम अपने इस लेख में यह कह सकते हैं कि ऐसे अधिकारी जिला के करुणा भवन में बैठे हुए हैं कि वह स्वयं ना तो अपना अधिकार जानते हैं और ना ही जनमानस के प्रति कर्तव्य ना तो उनके स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं और ना ही विधि पूर्ण जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही बाकी सब कुछ ठीक है।

【3】 *क्या जिला पंचायत प्रशासनिक तौर पर हो गई बेलगाम*?

जिला पंचायत पंचायती राज व्यवस्था की सबसे बड़ी मंदिर है जहां से उस अवधारणा को साकार किया जाना होता है जिसकी कल्पना भारत के संविधान में लोक कल्याणकारी राज्य के रूप में की गई है ग्राम पंचायतें जिला पंचायत के द्वारा अधिशासी होती हैं लेकिन जरा सोचिए ग्रामीण अंचल में बैठा एक अशिक्षित व्यक्ति जब यह कहता है कि जिन सरपंच सचिवों द्वारा मेरे कर्तव्यों और अधिकारों का हनन किया गया है उनकी शिकायत में जिला पंचायत में करूंगा और फिर वह कभी जिला पंचायत का दर्शन करे जहां लिपिक द्वारा योजनाओं की अनुमति ग्राम पंचायतों को प्रदान कर दी जाती है जिस जगह पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत का हस्ताक्षर लगना चाहिए उस जगह लिपिक हस्ताक्षर करके कार्य स्वीकृत कर देता है पैसे भी आहरण हो जाते हैं सचिवों का निलंबन और बहाली भी बाबू द्वारा किया जाता है तो फिर प्रिय साथियों यह कलेक्टर और मुख्य कार्यपालन अधिकारी किस लिए होते हैं यह आम जनमानस के हृदय में बातें हल्को रे मरती होगी इसका सीधा सा मतलब यह है कि अगर किसी गैर जिम्मेदार छोटे कर्मचारी द्वारा कलेक्टर और सी ई ओ का कार्य किया जा रहा है मतलब बेलगाम हो गया है सीधी का जिला प्रशासन और हावी है जिले में बाबू राज यह बात आम सी हो गई है की बाबू सेटिंग बना लीजिए तो कलेक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं आज बस इतना ही फिर मिलेंगे अगले रविवार को कुछ ज्वलंत सवालों के साथ

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