*विंध्य का नव निर्माण विंध्य के लोगों की ताकत और क्षमता से ही संभव: नारायण*

*विंध्य का नव निर्माण विंध्य के लोगों की ताकत और क्षमता से ही संभव: नारायण*

*लालच छोडें, साथ में आएं विंध्य के नेता: लक्ष्मण*

*चुरहट में हुआ ‘हमारा विंध्य लौटा दो’ का आयोजन*

मध्य प्रदेश जिला सीधी जी हां हम बात कर रहे हैं विंध्य प्रदेश के नव निर्माण को लेकर चुरहट में भाजपा विधायक मैहर नारायण त्रिपाठी, मऊगंज के पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी की उपस्थिति में अरुण द्विवेदी के नेतृत्व में विशाल आम सभा का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर *’हमारा विंध्य हमें लौटा दो’* के अभियान की अगुआई कर रहे *नारायण त्रिपाठी* विधायक मैहर ने कहा कि जिस दिन विंध्य के लोग यह तय कर लेंगे कि हमारा विंध्य प्रदेश हमें लौटा दिया जाय उस दिन विंध्य को लौटाना ही पड़ेगा। उन्होनें कहा कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेई ने ये बात कही थी कि छोटे-छोटे राज्यों का निर्माण करनें से राज्यों का समुचित विकास होगा। इसी के तहत उन्होनें देश में कई राज्यों का गठन भी कराया था। श्री त्रिपाठी ने कहा कि विंध्य प्रदेश तो आजादी के बाद से ही प्रदेश बन गया था। किंतु उस समय के तत्कालीन नेताओं ने पता नहीं किस लालच में आकर विंध्य का विलय मध्य प्रदेश में कर दिया था। जिस समय विंध्य का विलय हो रहा था उस समय यह तय किया गया था कि रीवा को प्रदेश की राजधानी का दर्जा मिलेगा। किंतु विगत 65 वर्षों से विंध्य को किसी सरकारों से कुछ नहीं मिल पाया है। मैं गांव-गांव जाकर विंध्य के पुर्ननिर्माण का अभियान चलाऊंगा। जब तक विंध्य का गठन नहीं हो जाता तब तक मैं दम नहीं लूंगा और अपना पूरा जीवन इसी कार्य में समर्पित कर दूंगा। उन्होनें कहा कि विंध्य के बडे-बडे नेता सत्ता के लालच में आकर मौन धारण किए हुए हैं। किंतु मैं ऐसी राजनीति नहीं करता। विंध्य के नव निर्माण में जो नेता अगुआई करना चाहें उनका स्वागत है। मैं उनके नेतृत्व में काम करनें के लिए तैयार हूं। विंध्य का नव निर्माण विंध्य के एक-एक लोगों की ताकत और क्षमता से ही बनेगा। इसे जन आंदोलन व छात्र आंदोलन बनानें की जरूरत है।

इस अवसर पर मऊगंज के पूर्व विधायक *लक्ष्मण तिवारी* ने कहा कि विंध्य के हर एक सांसद विधायकों को सत्ता की लालच छोंडकर विंध्य के नव निर्माण का प्रयास करना चाहिए। उन्होनें कहा कि 1956 में विंध्य के नेताओं की निष्क्रियता के कारण विलय हुआ है। जिन-जिन प्रदेशों का मध्य प्रदेशों में विलय हुआ था वहां जो-जो प्रमुख प्रदेश स्तर के कार्यालय थे वह वहीं रह गए। किंतु रीवा में प्रदेश स्तर का कोई भी कार्यालय संचालित नहीं किया गया। विंध्य की लगातार 65 वर्षों से आर्थिक सामाजिक व राजनैतिक उपेक्षा होती रही है। जबकि मध्य प्रदेश को अकेले 33 प्रतिशत राजस्व देनें वाला विंध्य प्रदेश ही है।
इस अवसर पर उक्त आयोजन के कर्ता-धर्ता अरुण द्विवेदी, महेन्द्र शुक्ला,शत्रुधन तिवारी, अजय पाण्डेय, राजेन्द्र द्विवेदी, रिंकू शुक्ला, लाल भाई शुक्ला आदि हजारों लोग उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *