आवक जावक शाखा कलेक्ट्रेट से गायब होते जन सामान्य के आवेदन, कार्यवाहियों के प्रतिवेदन।

आवक जावक शाखा कलेक्ट्रेट से गायब होते जन सामान्य के आवेदन, कार्यवाहियों के प्रतिवेदन।

कलेक्टर अनभिज्ञ, सख्त कार्यवाही की दरकार

क्या जनसुनवाई में दिए गए आवेदन कैसे जावक शाखा कलेक्ट्रेट से गोल हो जाते हैं

चुरहट विधानसभा के आम नागरिकों के द्वारा जनसुनवाई में दिए गए आवेदन गोल हो जाना जिला प्रशासन पर लग रहा सवालिया निशान

मध्य प्रदेश सीधी जिला क्या भूत या जींद खा जाता है उन आवेदनों को जो ग्राम भटहा और नकवेल के फर्जी नक्शा तरमीम के संबंध में जन सुनवाई में दिये जाते हैं।
जी हां, जब आप इस खबर को पढ़ोगे तो आपको यही लगेगा। कल दिनांक 17 जुलाई को कलेक्ट्रेट जन सुनवाई में आये ग्राम नकवेल के कुछ आम नागरिकों ने बताया कुछ ऐसा था हैरान करने वाले अपने गांव की सरकारी जमीन मे कब्जा हटवाने और गलत नक्शा तरमीम से होने वाली परेशानियों को दूर करने नक्शा को ठीक कराने का आवेदन 3 जुलाई के जनसुनवाई में दिए गए थे, तब ना तो उन्हें कोई पावती की प्राप्ति मिली और ना ही कोई टोकन ।
लेकिन उन्होंने इसी आवेदन को 4 जुलाई को तहसीलदार चुरहट को दिया था जिसकी आवेदनकर्ता के पास पावती है। किसी भी तरह की कार्यवाही को न होते देख ग्रामीणों ने 17 जुलाई को मंगलवार जन सुनवाई में भी पहुंचे हैं ।
जब हमने तहसीलदार का बयान चाहा तो उन्होंने सिर्फ यह कहा कि कलेक्ट्रेट से अभी तक कोई पत्र नही आया, 26 जून की जन सुनवाई के आवेदन पे व्हाट्स एप पे निर्देश मिले तो मैंने जिले को कार्यवाही हेतु टीम के लिए लिखा है, 4 जुलाई को एक आवेदन तो आया था लेकिन उसके बाद उस दिन रिलीव होने के कारण मैं कोई कार्यवाही प्रस्तावित नही कर पाई।
अब सवाल यह है कि 26 जून की जन सुनवाई का वो नक्शा तरमीम सुधार के लिए दिया गया आवेदन कहाँ गोल हो गया क्या जिला प्रशासन में बैठे अधिकारी कर्मचारी आवेदन दबाने का प्रयास कर रहे हैं
वेवा महिला ललिता यादव भटहा भी अपने खेत मे धन रूपाई को लेकर आशंकित है क्योंकि इस गलत नक्शा तरमीम की वजह से किसी अन्य का प्लाट उसके खेत मे दिख रहा है, आखिर 3 जुलाई की जन सुनवाई का उसका आवेदन अभी तक संबंधित अधिकारी तक क्यों नही पहुंचा ?
वृद्ध गयाप्रसाद और प्रधानमंत्री आवास पे लगी रोक का हटने का इंतज़ार करता बेटा भी चाहता है कि नक्शा सुधार हो और उसकी खामी ठीक कराई जाए जिससे उनका बंटवारा हो सके। गया प्रसाद भी 3 जुलाई को अपनी बहू को भेजकर आवेदन दिलवाया जिसका अभी तक अता पता नहीं ।
इसके अलावा कई बड़े बड़े प्रकरणों की डाक नहीं पहुचने दी जाती।
हैरान करने वाली बात यह है कि इन सभी आवेदनों का संबंध चुरहट के उसी वकील से है जिस पर सरकारी जमीन पे गलत नक्शा तरमीम करवाने का आरोप लग रहा है।
आखिर यह उसका रसूख है या उसकी और कलेक्ट्रेट के कर्मचारियों की मिली भगत।
फिलहाल कलेक्टर सीधी अब इस विषय मे क्या कार्यवाही करेंगे यह तो भविष्य की बात है आपको बताते चलें इन सब आवेदनों को गोल कराने में कई कर्मचारियों के हाथ होने की बात सामने आ रही

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