जैसा मांझी का काम, वैसा ही मझिआइन केर कलेवा।- उमेश तिवारी

जैसा मांझी का काम, वैसा ही मझिआइन केर कलेवा।- उमेश तिवारी

खोखली घोषणा तो खोखला आशीर्वाद भी।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह संघ के तपे तपाये खरे-खरे असली स्वयंसेवक है जो सुबह से शाम तक झूठ ही बोलते हैं उनके लिए यह सामान्य बात है और उन्हें इसमें मजा आता है। अपने झूठ के सहारे किसी दूसरे को चकित या भ्रमित करना उनके बांए हाँथ का खेल है। बहरहाल, शिवराज सिंह अपनी इस आदत या शौक के बारे में चाहे जो सोचें लेकिन मनोचिकित्सकों की निगाह से यह एक बीमारी है। वह झूठ बोलने की बीमारी के शिकार है वह व्यक्ति अपने ऐसे व्यक्तित्व की वजह से चाह कर भी सच नहीं बोल सकता। आदतन झूठ बोलने वाले को किसी अच्छे मनोचिकित्सक और मनोवैज्ञानिक की सलाह लेकर उपचार लेना चाहिए।

जन आशीर्वाद का प्रोपेगंडा ?
शिवराज सिंह प्रोपेगंडा करने में माहिर है वह बखूबी समझते हैं कि प्रोपेगंडा करने वाले को लोग इसलिए नहीं पसंद करते कि आपने क्या किया और उनके लिए क्या किया। बल्कि आपको इसलिए याद किया जाता है कि आपने अपनी बातों के माध्यम से उन्हें क्या महसूस कराया। मसलन प्रोपेगंडा में यह बात बहुत मायने नहीं रखती की आप जो कह रहे हैं उसका मतलब क्या है बल्कि आपने कितने अच्छे तरीके अनुभूति करने की छाप छोडी। अपने 15 साल के कार्यकाल में मामा-भांजे के प्रोपेगंडा में यही शिवराज सिंह ने किया है और अब जन आशीर्वाद का प्रोपेगंडा सीधी सीधी में कर रहे हैं।

आशीर्वाद या बद्दुआ ?
शिवराज सिंह चौहान जिस बेशर्मी और दुस्साहस के धनी हैं उनके जोड़ का तो मध्यप्रदेश में कोई नहीं है शायद ही देश में भी कोई नेता हो। सीधी जिले के साथ उन्होंने ऐसा अक्षम्य अपराध किया है जिसकी भरपाई कभी सम्भव नही है। सीधी को खंडित करके सीधी और सिंगरौली दो टुकड़े कर दिए सिंगरौली को अलग करके देश मे सीधी की पहचान मिटा दिए बाहर भले सीधी को न जानते रहे हो पर सिंगरौली को तो उर्जाधानी के रूप में देश दुनिया मे पहचाना जाता था। सीधी जिले के कई शासकीय कार्यालयों को सीधी से अलग कर अन्यत्र स्थानांतरित कर दिए टाउन प्लानिंग कार्यालय, हाउसिंग बोर्ड कार्यालय सीधी से हटाने के कारण यहां के लोगों की परेशानी की पीड़ा समझी जा सकती है। सीधी जिले में विधि की कक्षाएं बंद होने की वजह भी यही शिवराज सिंह है। इसी तरह सीधी जिले में स्थापित अपेक्स बैंक की शाखा को भी बंद कराया गया। सेन्ट्रल CID के कार्यालय सहित दर्जनों कार्यालय सीधी से अन्यत्र ले जाए गए। सीधी जिले को पंगु करने में शिवराज सिंह ने कोई कसर छोड़ी नहीं है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपने कार्यकाल के 15 वर्षों में सीधी जिले के लिए कुछ भी नहीं किया। शिक्षा के क्षेत्र में भी कोई गुणवत्तापूर्ण महाविद्यालय, तकनीकी एवं मेडिकल की पढ़ाई के लिए भी किसी संस्थान का संचालन नहीं किया। अपने पूर्व दौरों के दरमियान जो भी घोषणाएं की वह सभी खोखली ही साबित हो रही हैं खोखली घोषणाओं के दम पर यदि सीधी के मतदाताओं का आशीर्वाद मांगने आ रहे हैं तो इस बार आशीर्वाद भी खोखला ही रहेगा। हाँ शिवराज सिंह ने अपने राज में सीधी जिले के किसानों, ग्रामीणों और आदिवासियों को उद्योगपतियों के लिए लूटने एवं उजाड़ने में कोताही नहीं किए हैं चाहे वह मूसामूड़ी एवं भुमका के किसानों की भूमियां आर्यन पवार कंपनी को लुटाने की बात हो, गुलाब सागर डूब प्रभावित किसानों की सिचित जमीनों का असिंचित दर मुआबजा देना उनकी परिसम्पतियों का मुआबजा न देना, संजय टाइगर रिजर्व के 50 गांवों के ग्रामीणों को जोर-जबर्दस्ती हटाने का मामला हो ऐसे ही अन्य अनगिनत पाप शिवराज सिंह ने सीधी जिले के साथ किए हैं जो आशीर्वाद नहीं बद्दुआ के पात्र है। शिवराज सिंह की जनआशीर्वाद यात्रा के बारे में यही कहा जा सकता है कि-
“जैसा माझी का काम, उसी तरह मझिआइन केर कलेवा।”

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