*इन मंत्रियों ने किया शिवराज सरकार का दामन दागदार, पढ़ें इनके अपराध की कुंडली*

*इन मंत्रियों ने किया शिवराज सरकार का दामन दागदार, पढ़ें इनके अपराध की कुंडली*

*राहुल सिंह गहरवार प्रधान संपादक*

*स्वतंत्र इंडिया लाइव 7 की रिपोर्ट पढ़ें*

भोपाल। मध्यप्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का बिगुल बजते ही चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है. एमपी में बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है. इसके चलते दोनों पार्टियों का शीर्ष नेतृत्व भी चुनाव में पूरे जीजान से जुट गया है. ऐसे में कांग्रेस के निशाने पर शिवराज सरकार के दागी मंत्री आ सकते हैं.

*पार्टी के दागी मंत्री बीजेपी की मुश्किलें निश्चित तौर पर बढ़ा सकते हैं!*
शिवराज सरकार के कई मंत्रियों के खिलाफ मामले चल रहे हैं, उनमें से 6 के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं. साल के अंत में होने वाले मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं. ऐसे में शिवराज सरकार के दागी मंत्रियों के खिलाफ किसी न किसी मामले में केस दर्ज हैं.

*इन मंत्रियों पर हैं केस दर्ज*

जिन मंत्रियों पर केस दर्ज हैं, उनमें नरोत्तम मिश्रा, गौरीशंकर बिसेन, रुस्तम सिंह, ओमप्रकाश धुर्वे, राजेंद्र शुक्ल, जयभान सिंह पवैया, लाल सिंह आर्य, सुरेंद्र पटवा, संजय पाठक, विश्वास सारंग और जालम सिंह पटेल का नाम शामिल है. इनके अलावा कई अन्य मंत्री हैं जिन पर कई गंभीर आरोप भी हैं. ये जितने चौंकाने वाले तथ्य हैं, उतना ही सोचने पर भी मजबूर करते हैं. नरोत्तम मिश्रा और सुरेंद्र पटवा को छोड़कर अन्य मंत्रियों के खिलाफ दर्ज ये वो मामले हैं, जिनकी जानकारी खुद इन नेताओं ने अपने चुनावी हलफनामे में दी थी.

*मंत्री विश्वास सारंग*

सहकारिता, भोपाल गैस त्रासदी राहत, पुनर्वास (स्वतंत्र प्रभार), पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री विश्वास सारंग के खिलाफ एक मामला दर्ज है. अभी हाल ही में कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे मामले में उन पर षड्यंत्र रचने का आरोप लगा है. शिकायतकर्ता भुवनेश्वर मिश्रा ने अपने शिकायती आवेदन में मंत्री सारंग और जेलर पीडी श्रीवास्तव के ऊपर षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि ‘जेलर पीडी श्रीवास्तव और मंत्री सारंग ने मिलकर विधायक हेमंत कटारे और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रश्मि मिश्रा को झूठे केस में फंसाया है.’ उन्होंने अपने आवेदन में कहा कि ‘मंत्री सारंग के कहने पर एक वकील ने अवैधानिक तरीके से जेल प्रांगण में मुलाकात की और हस्त लिखित एक आवेदन लिया, जिसमें कटारे और एएसपी रश्मि मिश्रा के खिलाफ महिला थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है.’

*मंत्री लालसिंह आर्य*

जीएडी राज्यमंत्री लाल सिंह आर्य पर हत्या, गोहद भिंड में साल 2004 में न्यायालय का समन न लेने और शासकीय कार्य में बाधा डालने के मामला दर्ज हुआ है. कांग्रेसी विधायक माखन सिंह जाटव हत्याकांड में घिरे मंत्री लालसिंह आर्य इस केस में शुरू में आरोपी नहीं थे. प्रकरण की सुनवाई के दौरान गवाहों के बयानों में उनका उल्लेख होने के बाद अभियोजन की तरफ से प्रकरण में लालसिंह आर्य को आरोपी बनाए जाने के लिए आवेदन प्रस्तुत हुआ. सेशन कोर्ट ने 24 अगस्त को आवेदन स्वीकारते हुए हत्याकांड में आर्य को आरोपी बना दिया. आर्य के खिलाफ 6 बार जमानती वारंट जारी हुए, लेकिन वे कोर्ट के समक्ष उपस्थित नहीं हुए. इस पर 6 दिसंबर को भिंड के स्पेशल जज ने आर्य का गिरफ्तारी वारंट जारी किया था.

*मंत्री रुस्तम सिंह*

स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह के खिलाफ दो केस दर्ज हैं. इनमें हरियाणा के यमुना नगर थाने में धारा (498 ए) के तहत दर्ज मामला गंभीर है. यह पति और उसके रिश्तेदारों द्वारा किसी महिला पर क्रूरता से संबंधित है. मुरैना सिटी कोतवाली में शासकीय सेवक को ड्यूटी से रोकना और शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने का मामला दर्ज है.

*मंत्री गौरशंकर बिसेन*

गौरीशंकर बिसेन पर बालाघाट में साल 2008 में आईपीसी की धारा 316 के तहत मामला दर्ज है. याचिकाकर्ता किशोर समरीते ने उन पर 2008 से 2012 के बीच अकूत संपत्ति अर्जित करने की शिकायत की है, जो हाईकोर्ट में लंबित है. गौरिशंकर बिसेन को उनकी ही पार्टी के पदाधिकारी रहे संजय नगाइच के परिवाद के चलते हाल ही में एक और वारंट जारी हुआ है. नगाइच का आरोप था कि ‘बिसेन ने ब्राह्मणों पर अभद्र टिप्पणी की थी.’

*मंत्री जयभान सिंह पवैया*

उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया के खिलाफ सांप्रदायिक सद्भाव को क्षति पहुंचाने से लेकर डकैती तक के मामले हैं. उनके खिलाफ पूजास्थल को अपवित्र करना, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना, राष्ट्रीय एकता को हानि पहुंचाने वाले कार्य, भड़काऊ भाषण और शासकीय सेवक को ड्यूटी से रोकने के आरोप हैं. स्पेशल सेशन कोर्ट लखनऊ में चार्ज फ्रेम लिए जा चुके हैं.

*मंत्री संजय पाठक*

प्रदेश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (स्वतंत्र प्रभार) मंत्री संजय पाठक पर 2008 में विजयराघवगढ़ के सरकारी अस्पताल के उद्घाटन के दौरान हुए विवाद को लेकर मामला दर्ज किया गया था. हालांकि नवंबर 2017 में राज्यमंत्री संजय पाठक सहित 18 लोगों को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया है. वहीं मंत्री पर 500 करोड़ के हवाला घोटाले का भी आरोप लगा है.

*मंत्री सुरेंद्र पटवा*

पर्यटन मंत्री सुरेंद्र पटवा पर चेक बाउंस होने और 36 करोड़ के लोन मामले में केस दर्ज किया गया है. पटवा ने इंदौर की एक फर्म से ब्याज पर 10 लाख रुपये उधार लिए थे. इसकी अदायगी के लिए जो चेक दिया वह बैंक से वापस आ गया. रुपये उधार देने वाली फर्म ने जिला कोर्ट में पटवा के खिलाफ परिवाद दायर किया गया है. वहीं बैंक से 36 करोड़ रुपये का लोन लेकर नहीं चुकाने के मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा ने कर्ज लेने वाली संस्था मेसर्स पटवा ऑटोमेटिव प्रालि, लसूड़िया मोरी, देवास नाका इंदौर और कर्जदार के जमानतदार राज्यमंत्री सुरेंद्र पटवा, उनकी पत्नी मोनिका पटवा, भाई भरत पटवा व अन्य के खिलाफ कलेक्टर (डीएम) कोर्ट में केस दायर किया गया है.

*मंत्री जालम सिंह पटेल*

मंत्री जालम सिंह पटेल पर दो मामले दर्ज हैं. जालम सिंह को दो मामलों में एसआईटी जबलपुर तलाश रही है. पहला मामला दिसम्बर 2014 में गोटेगांव थाना में अपराध क्रमांक 716/14 धारा 147, 148, 149, 294, 506, 307 भादवि और 25/27 आर्म्स एक्ट का है. दूसरा मामला भी दिसम्बर 2014, गोटेगांव थाने में अपराध क्रमांक 717/14 धारा 147, 148, 149, 307,186, 353, 332 का है. जिसमें भी एसआईटी पटेल की तलाश कर रही है. इसके अलावा भी कुछ मंत्री है जिनको लेकर हुए विवाद इन दिनों चुनावी सुर्खियों में हैं.

*मंत्री नरोत्तम मिश्रा*

चुनाव आयोग की एक सूची को लेकर मंत्री नरोत्तम मिश्रा सुर्खियों में है, लेकिन आयोग ने स्थिति स्पष्ट कर दी है. मामला चुनाव लड़ने के आयोग्य को लेकर था, फिर भी अभी चुनाव आयोग इस मामले में सुप्रीम कोर्ट गया है. जहां मामला लंबित है. मंत्री चुनाव भी लड़ेंगे यह भी साफ हो गया है.

*मंत्री रामपाल सिंह*

मामला भले ही मंत्री रामपाल सिंह के बेटे से जुड़ा हुआ हो, लेकिन इससे खासी सरगर्मी में रहे मंत्री रामपाल की पुत्रवधु की आत्महत्या का मामला भी बीजेपी और मंत्री के लिए चुनाव में सरदर्दी पैदा कर सकता है. घटना के बाद से पूरे प्रदेश में रघुवंशी समाज उनके विरोध में उतर चुका है.

*मंत्री सूर्यप्रकाश मीणा*

मंत्री सूर्यप्रकाश मीणा पर किसानों के नाम पर परिवार को विदेश यात्रा करवाने के आरोप लगे हैं, उस मामले में बीजेपी के ही अनुसांगिक संगठन भारतीय किसान संघ में उनको लेकर नाराजगी है.

*मंत्री गौरीशंकर शेजवार*

मंत्री गौरीशंकर शेजवार भी परिवार को सरकारी पैसों पर यात्राएं करवाने को लेकर विवाद में आये, बाद में उन पर मजदूरों को खराब गुणवत्ता के जूते बंटवाने के भी आरोप लगे, जिसके चलते बीजेपी को पूरे प्रदेश में बड़ा वोट बैंक खिसकते नजर आया, लेकिन स्थानीय स्तर पर उनका सबसे ज्यादा विरोध उनके बेटे की फेसबुक पोस्ट के चलते हुआ है. हालांकि बीजेपी सिर्फ मामले दर्ज हो जाने से दागी नहीं मानती. पार्टी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल का कहना है कि ‘बावजूद इसके हमारी कोशिश होगी कि स्वच्छ छवि के नेताओं की ही टिकिट मिले.’ दूसरी तरफ कांग्रेस की मीडिया प्रभारी शोभा ओझा ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पर ही इस मामले को लेकर सवाल खड़े कर दिये.

*चुनावी रण से पहले बीजेपी में अंदरूनी घमासान, चौथी बार की राह नहीं आसान*

भोपाल। सूबे में होने वाले सियासी संग्राम के लिये बीजेपी-कांग्रेस अपनी-अपनी तैयारियों में कोई कसर बाकी नहीं रखना चाहती, ताकि चुनावी दंगल में विरोधियों को चारो खाने आसानी से चित कर सकें. लेकिन, 15 सालों से सूबे की सत्ता पर राज कर रही बीजेपी के लिये इस बार की राह आसान नहीं दिखती क्योंकि एक तरफ उसे पार्टी के खिलाफ बढ़ती एंटी इनकम्बेसी को रोकना है तो दूसरी तरफ पार्टी में बगावत पर भी लगाम लगाना है. जो चुनावी समर में किसी चुनौती से कम नहीं है.

दरअसल, सियासी घमासान से पहले बीजेपी में अंदरूनी घमासान मचा है. चौथी बार कांग्रेस को पटखनी देने का दम भरने वाली बीजेपी को अपनों के बगावत का डर सता रहा है क्योंकि कई लोग अब तक कमल का साथ छोड़ चुके हैं, जिनमें से कुछ कांग्रेस के साथ चल दिये तो कुछ हाथी पर सवार हो गये, पर बीजेपी को डर इस बात से है कि कहीं कोई विभीषण बन गया तो फिर उसका अंजाम क्या होगा. हालांकि, चुनाव के वक्त सभी दलों में भगदड़ मचना आम बात है, पर सत्ताधारी दल के लिए ये भगदड़ बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है. अब तक इन दिग्गजों ने छोड़ी बीजेपी.

*पढ़ेंः इन मंत्रियों ने किया शिवराज सरकार का दामन दागदार, पढ़ें इनके अपराध की कुंडली*

*पद्मा शुक्ला*

महाकौशल अंचल के कटनी जिले से आने वाली बीजेपी की कद्दावर नेता और सरकार में मंत्री का दर्जा प्राप्त पद्मा शुक्ला ने अचानक पार्टी से इस्तीफा देकर कांग्रेस का दामन थाम लिया. उनके इस कदम से सियासी गलियारों में हड़कप मच गया. पद्मा शुक्ला महाकौशल में बीजेपी की कद्दावर नेता के रुप में जानी जाती थीं. पिछले चुनाव में वे कांग्रेस के प्रत्याशी से बेहद मामूली अंतर से चुनाव हारी थीं. लेकिन, अब उन्होंने खुद को पार्टी में उपेक्षित बताकर कांग्रेस के साथ चली गईं.

*कम्प्यूटर बाबा*

मध्यप्रदेश सरकार में राज्यमंत्री का दर्जा का प्राप्त कम्प्यूटर बाबा ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. जो बीजेपी के लिये बड़ा झटका माना जा रहा है. उन्होंने शिवराज सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुये कहा कि सरकार अपने वादों को पूरा नहीं कर रहे हैं. हालांकि, उनके इस इस्तीफे की पीछे कई वजहें हो सकती हैं. कप्प्यूटर बाबा विधानसभा चुनाव में बीजेपी से टिकट मांग रहे थे. जो शायद उन्हें पूरा होते नहीं दिखा. जिससे नाराज होकर उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. अब देखना दिलचस्प होगा कि कम्प्यूटर बाबा का अगला कदम क्या होगा.

*पुष्पराज सिंह*

पिछले दिनों विंध्य के दौरे पर आये कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में रीवा रियासत के राजा कहे जाने वाले पुष्पराज सिंह ने कांग्रेस की सदस्यता ले ली. हालांकि, वे पहले भी कांग्रेस में रह चुके हैं. उसके बाद उन्होंने सपा से लोकसभा का चुनाव लड़ा था. सियासी गलियारों में यह बात भी सामने आई थी कि चुरहट विधानसभा सीट से अजय सिंह के खिलाफ बीजेपी पुष्पराज सिंह को उतारने वाली है. लेकिन, अचानक से उनके कांग्रेस ज्वाइन करने पर बीजेपी भी हैरान रह गई. वो तो अच्छा रहा, सही वक्त पर कांग्रेस ने पुष्पराज सिंह को पार्टी में शामिल कर लिया, अन्यथा चुरहट में कांग्रेस को झटका लग सकता था.

*नरेंद्र मरावी*

शहडोल जिले में बीजेपी को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के दिग्गज नेता नरेंद्र मरावी ने नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की मौजूदगी में कांग्रेस का दामन थाम लिया. नरेंद्र मरावी ने खुद को भाजपा में उपेक्षित बताते हुए दबाव डालने का आरोप भी लगाया था. नरेंद्र शहडोल में बीजेपी का बड़ा चेहरा माने जाते थे. उनके बगावत का खामियाजा बीजेपी को भुगतना पड़ सकता है.

*अभय मिश्रा*

विंध्य अंचल में बीजेपी को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब रीवा जिला पंचायत अध्यक्ष और सेमरिया से वर्तमान बीजेपी विधायक नीलम मिश्रा के पति अभय मिश्रा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद अभय मिश्रा ने कांग्रेस की सदस्यता भी ले ली. सियासी गलियारों में हलचल तेज है कि कांग्रेस उन्हें बीजेपी के कद्दावर मंत्री राजेंद्र शुक्ल के खिलाफ चुनाव में खड़ा कर सकती है.

*पुष्कर सिंह तोमर*

सतना के पूर्व महापौर पुष्कर सिंह किसी समय में बीजेपी का बड़ा चेहरा माने जाते थे. जो अब हाथी पर सवार हो गये हैं. इन्हें बसपा ने सतना से प्रत्याशी भी घोषित कर दिया है. सवर्णों के बीच इनकी खासी पैठ है, ऐन वक्त पर पुष्कर का हाथी पर सवार होना बीजेपी के लिए जोखिम भरा हो सकता है.

*लक्ष्मण तिवारी*

एससी-एसटी एक्ट में हुए संसोधन के खिलाफ बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी के इस्तीफे से पार्टी में हड़कप मच गया. उन्होंने बीजेपी पर नीतियों से हटकर काम करने का आरोप लगाते हुये कमल का दामन छोड़ दिया. तिवारी विंध्य अंचल में बीजेपी का बड़ा ब्राह्मण चेहरा माने जाते थे.

*दीपक पचौरी*

महाकौशल अंचल में बीजेपी के कद्दावर नेता और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के करीबी माने जाने वाले दीपक पचौरी के इस्तीफे से बीजेपी में खलबली मच गई. दीपक जबलपुर सहित पूरे अंचल में एक व्यापक जनाधार वाले नेता माने जाते थे. उन्हें सवर्णों का भी अच्छा समर्थन हासिल था. लेकिन, आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया.

इन सब नेताओं के अलावा भी बीजेपी में ऐसे नेताओं की फेहरिस्त लंबी है, जिन्होंने पार्टी से इस्तीफा दिया है. होशंगाबाद बीजेपी जिलाध्यक्ष रघुंनदन शर्मा, पूई विधायक सुनील मिश्रा, नरेश जिंदल, अशोक गर्ग, बृजेंद्र तिवारी जैसे कई और नाम भी इस्तीफा देने वालों की लिस्ट में शामिल हैं.

पढ़ेंः एमपी की इस बगिया ने नहीं दिया ‘हाथ’ का साथ, दशकों से खिला रही ‘कमल’

*चुनावी समर से पहले बीजेपी में अंतर्द्वन्ध क्यों?*

तीन बार से सूबे की सत्ता पर काबिज बीजेपी के लिये 2018 का चुनाव अबतक का सबसे मुश्किल चुनाव माना जा रहा है. एट्रोसिटी एक्ट से लेकर किसान आंदोलन तक कई मुद्दे बीजेपी के गले की फांस बने हैं. वहीं, टिकट वितरण भी पार्टी की एक बड़ी समस्या बनी हुई है. तीन बार से सत्ता पर काबिज बीजेपी का राज्य में बड़ा संगठन बन गया है. यही वजह है जिन्हें टिकट की आस कम है, वह पार्टी छोड़ रहे हैं, जबकि घर वापसी का ख्वाब देख रही कांग्रेस भी बीजेपी के नेताओं पर डोरे डाल रही है. जिसकी एक बानगी कमलनाथ ने पेश कर ही दी है. कमलनाथ के बयान के अनुसार बीजेपी के कई नेता कांग्रेस में शामिल होना

*सपा ने सेनापति को मैदान में उतार बढ़ा दिया रण का रोमांच, बीजेपी-कांग्रेस की राह नहीं आसान*

भोपाल। मध्यप्रदेश में चुनावी रणभेरी बजते ही पार्टियों ने प्रत्याशियों की घोषणा करनी शुरू कर दी है. आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है, जबकि आप और सपा दूसरी सूची भी जारी कर चुकी हैं. खुजराहो में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मध्यप्रदेश समाजवादी पार्टी के सेनापति गौरी सिंह यादव को रायसेन जिले के सिलवानी अखाडे़ में उतार दिया है. यह सीट सूबे की हाइप्रोफाइल सीटों में से एक है.

दरअसल, पहले इस बात की चर्चा थी कि यूपी की तर्ज पर एमपी में भी सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन होगा. लेकिन, अब इन संभावनाओं पर पूर्ण विराम लग चुका है. सपा अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा भी शुरु कर दी है. प्रदेश अध्यक्ष गौरी सिंह यादव को जिस सिलवानी-बेगमगंज विधानसभा सीट से प्रत्याशी घोषित किया गया है, वह बेहद हाई प्रोफाइल सीट मानी जाती है. फिलहाल इसी सीट से कद्दावर मंत्री और सीएम शिवराज के करीबी रामपाल सिंह राजपूत विधायक हैं.
*पढ़ेंः एमपी की इस बगिया ने नहीं दिया ‘हाथ’ का साथ, दशकों से खिला रही ‘कमल’*
हाई प्रोफाइल सीट है सिलवानी
2008 के चुनाव से अस्तित्व में आई रायसेन जिले की सिलवानी-बेगमगंज विधानसभा सीट हाई प्रोफाइल मानी जाती है. पिछले चुनाव में भी इस सीट पर जबरदस्त मुकाबला देखने को मिला था. इस सीट पर चुनाव की घोषणा के बाद सपा ने सबसे पहले प्रत्याशी की घोषणा की है. जिससे कांग्रेस-बीजेपी में भी अब प्रत्याशी चयन को लेकर समस्या खड़ी हो सकती है क्योंकि यहां से कांग्रेस के कई दावेदार हैं तो बीजेपी में अब तक रामपाल सिंह के रुप में सिर्फ एक ही चेहरा नजर आया है.

पिछले दो चुनावो में हुआ है दिलचस्प मुकाबला
सिलवानी विधानसभा सीट पर अब तक हुये पिछले दो चुनाव में मुकाबला दिलचस्प रहा है. 2008 में पहली बार के चुनाव में यहां त्रिकोणीय मुकाबला हुआ था. जिसमें बीजेपी के प्रत्याशी और उस वक्त भी मंत्री रहे रामपाल सिंह राजपूत को उमा भारती की पार्टी भाजश से चुनाव लड़े देवेद्र पटेल से शिकस्त मिली थी, उसके बाद उमा भारती ने अपनी पार्टी का विलय बीजेपी में कर दिया था, इसके बाद देवेंद्र पटेल 2013 में टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर बीजेपी छोड़ कर चुनाव के वक्त कांग्रेस के साथ चल दिये और 2013 के रण में बीजेपी प्रत्याशी रामपाल सिंह के लिए चुनौती बनकर तो उतरे. लेकिन, चुनावी मैदान में उन्हें मुंह की खानी पड़ी.

*गौरी सिंह के मैदान में होने से बिगड़ सकता है बीजेपी-कांग्रेस का खेल*

सपा प्रदेश अध्यक्ष गौरी सिंह यादव के इस सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा के साथ ही बीजेपी-कांग्रेस के माथे पर चिंता की लकीरें खिंचना लाजमी है क्योंकि इस सीट पर यादव वोट बैंक निर्णायक भूमिका में रहता है, जबकि गौरी सिंह मूल रुप से सागर से आते हैं. जिसकी सीमाएं सिलवानी विधानसभा सीट से लगती हैं, साथ ही गौरी का यहां खासा प्रभाव भी माना जाता है. इसके अलावा इस सीट पर आदिवासी, ओबीसी, और सवर्ण भी अच्छे खासे हैं. हालांकि, अब तक बीजेपी-कांग्रेस के प्रत्याशी तो घोषित नहीं हुये हैं. लेकिन, अब उन्हें नये तरीके से समीकरण बैठाकर ही प्रत्याशी चयन करना होगा क्योंकि अब इस सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय होगा.

*बीजेपी को लगाना पड़ सकता है जोर*

सिलवानी सीट पर बीजेपी को इस बार पूरा जोर लगाना पड़ सकता है क्योंकि यहां से मंत्री और स्थानीय विधायक रामपाल सिंह राजपूत के खिलाफ ग्रामीण क्षेत्रों में विरोध भी देखने को मिला है, जबकि कुछ महीनों पहले उनकी बहू प्रीति रघुवंशी की आत्महत्या का मामला भी बीजेपी के लिये सिरर्दद बना हुआ है, इस सीट पर रघुवंशी समाज का भी अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है, जबकि प्रीति की खुदकुशी के बाद रघुवंशी समाज ने मंत्री रामपाल के खिलाफ विरोध भी दर्ज कराया था. ऐसे में अगर कोई भी वर्ग बीजेपी से नाराज होता है तो चुनाव में उसके लिये मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं.

कांग्रेस में प्रत्याशी चयन पर मंथन
वहीं, बात अगर कांग्रेस की करें तो इस सीट पर उसके कई नेता दावेदारी ठोकते नजर आ रहे हैं. जिनमें पूर्व विधायक देवेंद्र पटेल, लोक विजय शाह, शेर सिंह यादव, सुरेंद्र रघुवंशी जैसे नेताओं के नाम शामिल हैं. जो टिकट के लिये जोर अजामाइश करते नजर आ रहे हैं. प्रत्याशियों की संख्या ज्यादा होने के चलते यहां कांग्रेस भी मुश्किलों में घिरी दिख रही है क्योंकि प्रत्याशियों की संख्या अधिक होने की वजह से उसे बगावत का सामना भी करना पड़ सकता है. जिसके चलते यहां टिकट को लेकर कांग्रेस भी माथापच्ची कर रही है.

पढ़ेंः ये तीन वजहें विंध्य की सियासत में लाएंगी तूफान, नहीं सुनाई देगी ‘सफेद शेर’ की दहाड़
त्रिकोणीय हो सकता है मुकाबला
इस सीट पर चुनाव के परिणाम कुछ भी हों. लेकिन, यहां मुकाबला त्रिकोणीय होने की पूरी उम्मीद है. यहां बीजेपी-कांग्रेस के साथ सपा के मैदान में होने की वजह से मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है, जबकि अभी बसपा के प्रत्याशी के नाम का एलान नहीं हुआ है, अब आगे यदि सपा-बसपा में गठबंधन भी हो जाये तो भी इस सीट पर सबकी टकटकी लगी रहेगी क्योंकि यहां का सियासी ऊंट किस करवट बैठेगा, किसी को पता नहीं है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *