मध्य प्रदेश जिला सिंगरौली/भोपाल जी हां हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश में प्रशासनिक नियमों की धज्जियां उड़ाने और भ्रष्टाचार के मामलों में त्वरित कार्रवाई के दावों की हवा निकलती नजर आ रही है। प्रदेश की ऊर्जाधानी कहे जाने वाले सिंगरौली जिले के बैढ़न तहसील में पदस्थ पटवारी उमेश नामदेव का मामला इसका ताजा उदाहरण है। पटवारी के खिलाफ मध्य प्रदेश विधानसभा में ध्यानाकर्षण/प्रश्न उठाए जाने के बावजूद अब तक शासन-प्रशासन स्तर से कोई ठोस कार्रवाई न होना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि विधानसभा जैसे शीर्ष संवैधानिक मंच पर मामला गूंजने के बाद भी स्थानीय प्रशासन फाइल दबाकर बैठा हुआ है, जिससे भ्रष्ट तत्वों को बढ़ावा मिल रहा है।
नियम दरकिनार: तीसरी संतान छुपाने का गंभीर आरोप
मामले में सबसे बड़ा कानूनी पहलू ‘सेवा नियमों के उल्लंघन’ से जुड़ा है। सिविल सेवा नियमों के तहत निर्धारित तिथि के बाद तीन संतान होने पर शासकीय सेवा के लिए अयोग्यता का प्रावधान है। आरोप है कि पटवारी उमेश नामदेव ने अपनी तीन संतानों की जानकारी छुपाकर न केवल शासकीय नियमों का उल्लंघन किया, बल्कि पद पर बने रहने के लिए गलत तथ्य प्रस्तुत किए। नियमों के मुताबिक ऐसी स्थिति में नियुक्ति को अवैध मानते हुए तत्काल बर्खास्तगी या निलंबन की कार्रवाई की जानी चाहिए।
अकूत संपत्ति और भ्रष्टाचार की शिकायतें
केवल तीन संतान का मामला ही नहीं, बल्कि बैढ़न क्षेत्र में पदस्थ रहते हुए पटवारी पर पद के दुरुपयोग और अकूत संपत्ति अर्जित करने के भी गंभीर आरोप लगे हैं। शिकायतों के अनुसार, नामांतरण, सीमांकन और अन्य राजस्व कार्यों के एवज में जमकर मनमानी की गई है।
इन सवालों के जवाब बाकी हैं विधानसभा प्रश्न के बाद सन्नाटा क्यों? जब मामला विधानसभा के पटल पर आ चुका है, तो जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की? कौन दे रहा है संरक्षण? नियमों की स्पष्ट अवहेलना के बावजूद पटवारी को अब तक निलंबित न किया जाना प्रशासनिक सांठगांठ की ओर इशारा करता है।

