हम तो पूँछेंगे कलम की धार से रोहित*

*हम तो पूँछेंगे कलम की धार से रोहित*

【1】 *क्या विन्ध्य राजनीति में पैदा होंगे कोई दूसरे अर्जुन*?

【2】 *क्या बीजेपी के विपक्ष में आते ही लग गया समस्याओं का अंबार*?

【3】 *क्या विधायक के विरुद्ध उम्मीदवार उतारने वालों का कुछ नुकसान कर पाएंगे सीधी विधायक*?

मध्य प्रदेश जिला सीधी आज सोमवार है और साथ ही भगवान भोलेनाथ का पवित्र दिन महाशिवरात्रि भी है और आज ही के दिन चुरहट की माटी में जन्मे कुंवर अर्जुन सिंह का पुण्यतिथि भी है वाह चुरहट की तंग गलियों से धीरे धीरे राजनीति के ऊंचे पायदान में चढ़ते हुए हिंदुस्तान के राजनैतिक क्षितिज में पहुंच गए और वह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मानव संसाधन विकास मंत्री राज्यसभा सांसद राज्यपाल राज्य के विपक्ष के नेता जैसे अहम पदों को सुशोभित किए लेकिन कभी भी आम आदमी गरीब बदहाल व्यक्ति के लिए उनके पास पहुंचने का रास्ता नहीं बंद हुआ वह भरी सभा में तंग और परेशान व्यक्ति को पहचान लिया करते थे और उसकी हर संभव मदद करने का प्रयास किया करते थे सीधी में प्लास्टिक की सड़क भले ही ना बनी हो कई गरीबों के चूल्हे में आग जलाने और उन्हें दुनिया देखने लायक बनाए उस समय जब जीविकोपार्जन करना बहुत कठिन था तब वह आम गरीब की आवाज बन गए और इसी सादगी ने उन्हें चुरहट से ले जाकर दिल्ली के ऊंचे सिंहासन में बैठा दिया विंध्य राजनीति में 4 बड़े नेता थे अर्जुन सिंह, इंद्रजीत कुमार, चंद्र प्रताप तिवारी और श्रीनिवास तिवारी इन नेताओं की अपनी विचारधारा और कार्यशैली थी तंग बदहाल भारत मिलने के बाद इन्होंने अपनी अपनी शैली से जनता के बीच बने रहे जनता ने ने भरपूर सहयोग दिया लगभग इन इनके अंतिम पड़ाव तक इनके साथ रही हम आज इसलिए याद कर रहे हैं क्योंकि हम चंद्र प्रताप तिवारी के समय तो नहीं थे लेकिन आगे उल्लेखित तीनों नेताओं की राजनैतिक शैली को देखा और परखा है और आज की राजनीति को जब तुलना करते हैं तो यह पाते हैं की अब राजनेता दूसरे की बात पर पूर्णता विश्वास कर लेते हैं जनता अपने नेता से अपने दिल और घर परिवार की बात बताना चाहती है लेकिन नेता के चुनाव जीतते ही उनका आवभगत करने वाले लोग जनता से जोड़ने के बजाय अपने आप तक सीमित रखते हैं और यही कारण है कि 5 साल बीत जाने के बाद जब नेता पुनः जनता दरबार में जाता है तो स्थिति जवाबदेह हो जाती है। क्योंकि आज साइबर का युग है तो सारी बातें और बात अभिव्यक्ति जन जन तक पहुंच जाती हैं इस कारण जब भी नेता तक पहुंचने से जनता वंचित रह जाती है तो उनके इर्द-गिर्द रहने वालों से घृणा करने लगती है और सही समय आने पर जवाब जरूर देती है यह किसी एक राजनीतिक दल का नहीं बल्कि राजनीति का बदला हुआ परिदृश्य है इसलिए हम यह कह सकते हैं यह चारों नेता भले ही हम सब के बीच से चले गए हो लेकिन अपनी राजनैतिक शैली छोड़कर गए हैं यह पैदा होकर भले ही राजनीति में सेवा ना कर पाए लेकिन इनके जैसे बना जरूर जा सकता है आज कुंवर अर्जुन सिंह क पुण्यतिथि इसलिए उन्हें नम आंखों से याद करते हैं

【2】 *क्या बीजेपी के विपक्ष में आते ही लग गया समस्याओं का अंबार*?

मध्य प्रदेश में15 साल बाद बदलाव हो गया और अब लोकसभा चुनाव की भी घंटी बज चुकी है इसलिए सत्ता हो या विपक्ष सबके अपने-अपने दावे हैं और जनता को गिनाने के लिए अपने अपने तरीके लेकिन अगर बीते 15 साल और सीधी की गलियों को याद किया जाए तो स्थिति यह है की 15 साल में सीधी की जनमानस को एक साफ स्वच्छ सीधी और विकास की राह में बढ़ता हुआ शहर दिखाई नहीं दिया शहर की एकमात्र जिला चिकित्सालय के हालात बदल थी शहर में यातायात स्टेशन की अच्छी खासी कमी थी लेकिन इसे बदलाव का नतीजा कहें या प्रशासन द्वारा सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने की जिद कहें जो सीधी शहर को दिन प्रति बदल रहे हैं शहर 2 माह के अंदर अपने पुराने स्वरूप से नए कलेवर में आ गया लेकिन विपक्ष का अपना तरीका है विरोध का कोई दो विधायकों के साथ विरोध कर रहा तो कोई हारी हुई विधानसभा में विजय संकल्प दोहरा रहा लेकिन यहाँ विरोध सत्ता का कम खुद को साबित करने का ज्यादा था इसलिए यह कहा जा सकता है कि आंदोलन खुद को बेहतर साबित करने का था न कि सरकार का विरोध करने का

【3】 *क्या विधायक के विरुद्ध उम्मीदवार उतारने वालों का कुछ नुकसान कर पाएंगे सीधी विधायक*?

बीते विधानसभा चुनाव में सीधी विधायक के विरुद्ध उनके ही दल के निर्वाचित जनप्रतिनिधि ने चुनाव मैदान में उम्मीदवार उतारा और अपने तौर तरीके से जबरदस्त विरोध भी किया स्थित भले कुछ रही हो लेकिन इतना साबित हुआ की सीधी विधायक उनके ही दिल में स्वीकार्यता की कमी दिखी फिलहाल वह चुनाव जीत गए लेकिन चुनाव के पूर्व एक महिला जनप्रतिनिधि के लिए जिस तरह के शब्द उनके द्वारा निकाले गए उसकी समाज में राजनीतिक दुनिया से बाहर भी काफी विरोध हुआ उनके बारे में यह भी कहा जाता है कि वह सीधी के विकास में 18 भी आज तक नहीं रखें लेकिन कूटनीतिक इतनी जबरदस्त है की चुनाव में विजय हासिल कर ही लेते हैं पर उनके प्रति अविश्वास की इतनी गहरी खाई है कि कोई भी व्यक्ति उनका लंबे समय तक विश्वासपात्र नहीं रह सकता और ना ही उसके प्रति उनकी सकारात्मक सोच ही रहती है फिलहाल उनके ही दल में उनका जबरदस्त विरोध है और वह चाहते हैं की निर्वाचित सांसद का टिकट किसी न किसी रूप में कट जाए और वह लोकसभा के रास्ते दिल्ली पहुंच जाएं या फिर जिस तरह उनका विरोध किया गया है उसी तरह से कुछ रणनीति बनाकर लोकसभा की सीट से बेदखल किया जाए फिलहाल सीधी विधायक की सोच पूर्णता सही है और अगर वह बदला की भावना रखेंगे तो सीधी संसदीय क्षेत्र में 50000 बोट का नुकसान कर सकते हैं फिलहाल जबरदस्त जंग जारी है जंग जारी रहना चाहिए क्योंकि सीधी संसदीय क्षेत्र की जनता बीते 5 साल में सांसद की फोटो अखबारों में देखने के बजाए सब देखने के लिए तरस गई और अब उसका जवाब देने के लिए प्रजातंत्र की प्रजा उत्सुक है आज फिलहाल इतना ही फिर मिलेंगे अगले सोमवार को

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