*हम तो पूँछेंगे कलम की धार से- रोहितब*

*हम तो पूँछेंगे कलम की धार से- रोहितब*

【1】 *क्या राजीव गांधी के सम्बंध में पीएम की टिप्पणी वाकई निंदनीय है।*?

【2】 *क्या सीधी लोकसभा के कुछ पोलिंग में पुनर्मतदान प्रशासन की विफलता है*

【3】 *क्या कोष्टा की घटना लोकतंत्र पर प्रहार है*?

मध्य प्रदेश जिला सीधी आज मंगलवार है और हम अपनी खास पेशकश हम तो पूछेंगे कलम की धार के माध्यम से सोमवार की बजाय मंगलवार को कुछ गंभीर सवालों के साथ चुनावी व्यस्तता के बावजूद आप सभी के समक्ष स्नेह पूर्ण रूप से उपस्थित है आज पहला सवाल पूछ रहे हैं राष्ट्रीय मुद्दों पर एक ज्वलंत विषय के संबंध में लोकतंत्र की परिभाषा लगातार बदलती जा रही हैं राजनेता अपने आप को खो रहे हैं बोलते बोलते क्या से क्या बोल जाते हैं पहले सवाल में पूछ रहे हैं भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री और भारत रत्न राजीव गांधी के संबंध में देश के प्रधानमंत्री द्वारा की गई टिप्पणी के संबंध में जरा सोचिए जो टिप्पणी राजीव गांधी के संबंध में की गई अगर वही टिप्पणी भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई के लिए की जाती तो पूरा देश ऐसे राजनेता को क्षमा कर देता सवालों के जवाब के संबंध में पूरा लेख आपके समक्ष सादर संप्रेषित राजीव गांधी और भारत एक नजर मेंश्री गांधी से ज्यादा दुखद एवं कष्टकर परिस्थिति में कोई सत्ता में क्या आ सकता है जब 31 अक्टूबर 1984 को अपनी मां की क्रूर हत्या के बाद वे कांग्रेस अध्यक्ष एवं देश के प्रधानमंत्री बने थे। लेकिन व्यक्तिगत रूप से इतने दु:खी होने के बावजूद उन्होंने संतुलन, मर्यादा एवं संयम के साथ राष्ट्रीय जिम्मेदारी का अच्छे से निर्वहन किया।

महीने भर के लंबे चुनाव अभियान के दौरान श्री गांधी ने पृथ्वी की परिधि के डेढ़ गुना के बराबर दूरी की यात्रा करते हुए देश के लगभग सभी भागों में जाकर 250 से अधिक सभाएं कीं एवं लाखों लोगों से आमने-सामने मिले।
स्वभाव से गंभीर लेकिन आधुनिक सोच एवं निर्णय लेने की अद्भुत क्षमता वाले श्री गांधी देश को दुनिया की उच्च तकनीकों से पूर्ण करना चाहते थे और जैसा कि वे बार-बार कहते थे कि भारत की एकता को बनाये रखने के उद्देश्य के अलावा उनके अन्य प्रमुख उद्देश्यों में से एक है – इक्कीसवीं सदी के भारत का निर्माण।राजीव ने इनकम और कॉर्पोरेट टैक्स घटाया, लाइसेंस सिस्टम सरल किया और कंप्यूटर, ड्रग और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों से सरकारी नियंत्रण खत्म किया. साथ ही कस्टम ड्यूटी भी घटाई और निवेशकों को बढ़ावा दिया. बंद अर्थव्यवस्था को बाहरी दुनिया की खुली हवा महसूस करवाने का यह पहला मौका था. क्या उनको आर्थिक उदारवाद के शुरुआत का थोड़ा बहुत श्रेय नहीं मिलना चाहिए?
*गिराई चीन की दीवार*
राजीव गांधी ने दिसंबर 1988 में चीन की यात्रा की. यह एक ऐतिहासिक कदम था. इससे भारत के सबसे पेचीदा पड़ोसी माने जाने वाले चीन के साथ संबंध सामान्य होने में काफी मदद मिली. 1954 के बाद इस तरह की यह पहली यात्रा थी. सीमा विवादों के लिए चीन के साथ मिलकर बनाई गई ज्वाइंट वर्किंग कमेटी शांति की दिशा में एक ठोस कदम थी.
राजीव के चीनी प्रीमियर डेंग शियोपिंग के साथ खूब पटरी बैठती थी. कहा जाता है राजीव से 90 मिनट चली मुलाकात में डेंग ने उनसे कहा, तुम युवा हो, तुम्हीं भविष्य हो. अहम बात यह है कि डेंग कभी किसी विदेशी राजनेता से इतनी लंबी मुलाकात नहीं करते थे “पावर लोगों के हाथ में हो’
राजीव गांधी के ‘पावर टू द पीपल’ आइडिया को उन्होंने पंचायती राज व्यवस्था को लागू करवाने की दिशा में कदम बढ़ाकर लागू किया. कांग्रेस ने 1989 में एक प्रस्ताव पास कराकर पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा दिलाने की दिशा में कोशिश की थी. 1990 के दशक में पंचायती राज वास्तविकता में सबके सामने आया.
सत्ता के विकेंद्रीकरण के अलावा राजीव ने सरकारी कर्मचारियों के लिए 1989 में 5 दिन काम का प्रावधान भी लागू किया. ग्रामीण बच्चों के लिए प्रसिद्ध नवोदय विद्यालयों के शुभारंभ का श्रेय भी राजीव गांधी को जाता है

【2】 *क्या सीधी लोकसभा के कुछ पोलिंग में पुनर्मतदान प्रशासन की विफलता है*

बीते दिनों से लोकसभा सहित मध्य प्रदेश के 5 लोकसभा में आम चुनाव संपन्न हुए लेकिन सीधी लोकसभा कुछ कार्यों के लिए चर्चित हो गई सीधी जिले के समीप डेमा गांव में पुनर्मतदान हुआ मतदान का प्रतिशत पूर्व के मतदान से ज्यादा रहा इसका सीधा मतलब होता है कि मतदाताओं का जबरदस्त उत्साह रहा लोकतंत्र के प्रति मतदाता उत्साहित दिखे लेकिन इसके पीछे एक सवाल छूट गया सवाल यह की जब पूरे संसदीय क्षेत्र में चुनाव संपन्न हो गए तो फिर सीधी के समीप जिसमें पुनर्मतदान संपन्न हुआ क्या कारण रहा कि पुनः मतदान कराना पड़ा ऐसे में सवालिया निशान राजनीतिक दलों के ऊपर नहीं बल्कि प्रशासन के ऊपर पड़ता है कि अपने जबरदस्त कार्यों के कारण चर्चा में रहे जिला प्रशासन की विफलता कैसे साबित हो गई अगर विफलता न होती तो पुनर्मतदान की जरूरत ना पड़ती क्योंकि मतदाता आम इंसान होता है और वह दांव पेच से कोसों दूर रहता है और जब उसको चंद दिनों के अंदर ही पुनः लाइन में लगा दिया जाता है तो देश के लोकतंत्र पर सवाल उठने लगता है कि राजनेता जनता पर राज करते हैं और जनता परिचय पत्र लिए इनका चुनाव करने हेतु एक बार नहीं बार-बार लाइन में लगती है ऐसे में अबोध मतदाता तंग और परेशान हो जाता है क्योंकि उसके समझ में नहीं आता कि उसकी गलती क्या है

【3】 *क्या कोष्टा की घटना लोकतंत्र पर प्रहार है*?

लोकसभा चुनाव के दौरान कोसता गांव अचानक चर्चा में आ गया आरोप लगा की चुरहट में पोलिंग कैप्चर की जा रही है इस दौरान कैमरा साथ लिए लोकसभा की महिला सांसद पोलिंग बूथ पहुंच गई पहुंचते ही अपना लोकतांत्रिक नजरिया दिखाने का प्रयास शुरू कर दी इस नजरिए ने कई सवाल पैदा कर दिए वीडियो काटकर महज 59 सेकंड की वीडियो सोशल मीडिया में चलाना सवालों में रहा तो दूसरी तरफ सीधी संसदीय क्षेत्र के पूर्व सांसद गोविंद मिश्रा के गांव को बदनाम करने और सारी साजिश का ठीकरा उनके ऊपर फोड़ने का असफल प्रयास था लेकिन एक एक सच यह है की उस दौरान पोलिंग बूथ में मौजूद राजनीतिक दलों के अभिकर्ता ओं को चाहिए था कि संदेह की एक एक प्रश्न का जवाब देते और सामाजिक मर्यादाओं को ध्यान रखते अगर पोलिंग बूथ के अंदर वाकई कुछ गलत नहीं हो रहा था तो किसी महिला के संबंध में अभद्र टिप्पणी ना करते क्योंकि ऐसी टिप्पणियां समाज में जहर का काम करते हैं और गंभीर नेतृत्व जो चुनाव मैदान में है उसके ऊपर किसी तरह कोई सवाल ना पैदा होता क्योंकि बिना सोचे समझे कोई टिप्पणी कर देना सीधे नेता के ऊपर सवाल पैदा होता है और ऐसे व्यक्ति जो कांग्रेस की विचारधारा को बिल्कुल नहीं जानते वह अपनी टिप्पणी के माध्यम से परोक्ष रूप से नेता को बदनाम करते हैं ऐसे लोग ना तो नेता के हो सकते ना पार्टी के आज बस इतना ही फिर मिलेंगे अगले सोमवार को

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