*हम तो पूँछेंगे कलम की धार से रोहित*

*हम तो पूँछेंगे कलम की धार से रोहित*

【1】 *क्या पोल से एक्जिट हो पाएगी बीजेपी*?

【2】 *क्या अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही जिले के रसूखदारों पर भी होगी*

【3】 *क्या बदलते शहर के परिदृश्य से जनप्रतिधियों पर करारा प्रहार है।*?

मध्य प्रदेश जिला सीधी आज सोमवार है और हम अपनी खास पेशकस हम तो पूँछेंगे कलम की धार से के माध्यम से आज पहला सवाल पूंछ रहे हैं पोल से कैसे एग्जिट या इन हो जाती हैं सरकारें जी हैं कल से लगातार देश की मीडिया में अनावश्यक हो हल्ला मचा हुआ है ऐसे लग रहा मानो इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की एक डुप्लीकेट मशीन इन मीडिया वालों के पास हो और ये चुनाव के ठीक 3 दिन पूर्व मतगणना करके सरकार गठित कर दिए हों क्योंकि जिस बारीकी से पोल के रिजल्ट बताये जा रहे हैं उससे तो कम से कम यही प्रतीत होता है। अगर इस पोल के प्रारब्ध पर नजर दौड़ाई जाय तो यह पाया जाता है कि कई जगह इनकी ज्योतिषी असफल हुई है देश की राजधानी दिल्ली का चुनाव,बिहार,हाल ही में सम्पादित मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ का चुनाव उदाहरण हैं मैं ज्योतिष इसलिए कह रहा कि इस चिलचिलाती धूप में बेचारे मीडिया वाले 7 लाख लोगो के पास जाकर सर्वे किये जो विलक्षण प्रतिभा दर्शाता है। लेकिन एक दूसरा पक्ष यह भी है की इनका तुक्का काम भी बहुत करता है इसलिए पोल से बीजेपी एग्जिट होगी यह आवश्यक नहीं है।

【2】 *क्या अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही जिले के रसूखदारों पर भी होगी*?

इन दिनों सीधी के जनप्रिय कलेक्टर द्वारा शहर को खूबसूरत बनाने का अभियान जारी है वो जिस दिन से सीधी कलेक्टर के रूप में पदभार ग्रहण किये हैं उस दिन से अथक प्रयास कर शहर को खूबसूरत बना रहे हैं सीधी पूर्व के स्वरूप से परिवर्तित हो रही है और शहर के आमजनमानस सीधी कलेक्टर को किसी जनप्रतिनिधि से कम नहीं समझ रहे हैं लेकिन सवाल अभी भी बना हुआ है क्योंकि सीधी जिले के कई नामी गिरामी लोग मध्यप्रदेश शासन की भूमि पर बेजा कब्जा जमाए हुए हैं जिसमे

*संजय गांधी महाविद्यालय के भूमि का अतिक्रमण*

गोपदबनास से पूर्व विधायक राव कृष्ण कुमार सिंह भंवर साहब द्वारा मध्यप्रदेश शासन की सड़क पर अवैध बाउन्ड्री निर्माण
ऐसे उदाहरणों से आमजनमानस पर विपरीत असर होता है जिस पर भी कलेक्टर सीधी को नजर दौड़ानी चाहिए

【3】 *क्या बदलते शहर का परिदृश्य जनप्रतिनिधियों पर करारा प्रहार है।*

यह बात सही है कि सीधी दुल्हन जैसी सज रही है मूलभूत आवश्यकताओं को पूर्ण किया जा रहा है। अस्पताल,अतिक्रमण, सुंदर शहर से यातायात निकासी यह सब एक प्रशासनिक अधिकारी के जिद से संभव हो पा रहा है लेकिन अगर वैचारिक रूप से देखा जाय तो जिले के जनप्रतिनिधियों पर करारा प्रहार है क्योंकि शहर जिस स्वरूप की ओर जा रहा है वैसा पूर्व में भी बनाया जा सकता था लेकिन ऐसा राजनीतिक उदाशीनता की वजह से नहीं हो सका इसलिए जनता पूँछेंगी की अगर एक प्रशासनिक अधिकारी ऐसा कर सकता है तो आप क्यों नहीं? जिसे मेरे हांथों की अंगुलियों ने सत्ता पर बिठाया आज बस इतना ही फिर मिलेंगे अगले सोमावार को

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