पंचायत मंत्री व सांसद के गृह क्षेत्र में खनिज एवं भू माफिया का राज का देखें लाइव वीडियो

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मध्य प्रदेश जिला सीधी पंचायत के रेत खदान की मनमानी पर नहीं कंसा शिकंजा
–मनमानी शुल्क की वसूली कर रहे पंचायत के सरपंच सचिव
–मजदूरों की जगह पर मशीनों की जा रही रेत की लोडिंग
दबंग रिपोर्टर सीधी। जिले की ग्राम पंचायतो मे संचालित रेत खदानो की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रहा है, खदानो की शिकायत खनिज विभाग में होना आम बात हो चुकी है को मानकर खनिज अधिकारी शिकायत को रद्दी की टोकरी में फेंक देते हैं जब की पंचायत के रेत खदान को अपरोक्ष रूप से ठेकेदारों के द्वारा संचालन किया जा रहा है उनको संरक्षण जिले के अधिकारियों ने दे रखी है सरपंच सचिव नाम मात्र के रवर स्टाम्प बनकर रह गये है । जिस वजह से ठेकेदारों के द्वारा मनमानी रेट में रेत गांव के लोगों को भी दिया जा रहा है। जबकि शासन ने रेत खदान की मंजूरी ग्राम पंचायतो की जरूरतों की पूर्ति के लिए दिया था किन्तु डोल ग्राम पंचायत गोतरा भुमका पंचायत के सरपंच सचिव द्वारा मोटी कमीशन तय कर ठेकेदार को खदान की बागडोर सौप दी गई है जिससे ठेकेदार द्वारा अपने हिसाब से मनमानी रेट तय कर 15 से 20 हजार प्रति हाइवा की बसूली की जा रही है डोल और गोतरा भुमका खदान की अनियमितता को लेकर लगातार जिला प्रशासन एवं खनिज अधिकारी को अबगत करा कर कार्रवाई की मांग की गई है लेकिन आज तक किसी तरह की कोई कार्यवाही नहीं की गई।
सरकार की नीतियों का फायदा ले रहे अधिकारी व ठेकेदार
मध्य प्रदेश सरकार की नई खनन नीति का फायदा आमजन को होता नहीं दिख रहा। स्थिति यह है कि पंचायतों को सौंपी गई रेत खदानों का संचालन अभी भी ठेकेदार ही करते हैं। जो विभागीय अधिकारियों से मिलीभगत कर न सिर्फ रेत निकासी में मनमानी करते हैं, बल्कि आमजन से इसकी मनचाही कीमत भी वसूलते रहे हैं।
*पुलिस के साथ अधिकारियों की है मलीभगत*
ग्रामीडो द्वारा बताया कि डोल व भुमका पंचायतो को जारी रेत खदान मे से छोटे वाहन ट्रेक्टर व मिनी ट्रक से पंचायतों के निर्माण कार्य के लिए ही रेत की निकासी की जा सकती है। किंतु आलम यह है कि रेत खदानो से जिले की पंचायतों और जनता को मिलने के बजाय सतना रीवा, उत्तर प्रदेश से आने वाले हाइवा वाहनों को मनमानें दामो पर विक्री की जा रही है। इनका फायदा जिला प्रशासन पुलिस के आला अधिकारियों सहित खनिज और राजश्व अधिकारियों का संरक्षण मिला हुआ है।
दसगुना ज्यादा दाम चुकाने को मजबूर उपयोगकर्ता
शासन के द्वारा 125 रूपए घन मीटर रेत की कीमत निर्धारित की गई है लेकिन एक हजार घनमीटर की वसूली की जा रही है । बता दें की एक मिनी ट्रक मे तीन घन मीटर रेत आती है इससे ज्यादा होने पर ओव्हरलोड की श्रेणी मे आती है, ऐसी स्थिति मे एक मिनी ट्रक से 375 रुपए ही लेने चाहिए किंतु मिनी ट्रक मे 3 हजार से 4 हजार व हाइवा मे 15 से 20 हजार रूपए की वसूली की जा रही है। इस मनमानी से प्रशासन भलीभांति वाकिफ है किंतु बिभाग के वरिष्ठ अधिकारियो की मिलीभगत होने के कारण कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
*मोटी कमाई के लिए श्रमिकों की अनदेखी*
मध्य प्रदेश की पांच माह पूर्व की शिवराज सरकार के द्वारा पंचायतो को रेत खदान सौपते हुए इस पर स्थानीय लोगो को रोजगार मिलने पर भी जोर दिए थे। रेत उत्खनन व वाहनो मे लोडिग श्रमिक करेंगे तो उन्हें रोजगार मिल पाएगा, किंतु आलम यह है कि पंचायतो को हस्तानांतरित रेत खदानो मे उत्खनन व लोडिग़ के लिए कलेक्टर के द्वारा मशीन लगाने की अनुमति जारी कर दी गई है, यद्यपि उसमें शर्त रखी गई है कि स्थानीय श्रमिक न होने की दशा मे मशीन से उत्खनन किया जाएगा किंतु यहां स्थिति उल्टी है मजदूर खाली बैठे हुए हैं और उनका काम मशीने कर रही है। डोल रेत खदान मे दो तीन पुकलेन मशीन रेत उत्खनन के लिए लगाई गई है।

*सरपंचों ने बांधा साप्ताहिक कमीशन*
रेत की नई नीति में ग्राम पंचायतों को रेत का उत्खनन और परिवहन संबंधी अधिकार मिलने के बाद रेत का कारोबार करने वालों ने डोल ग्राम पंचायत के सरपंच से उनके कार्यकाल पूरा होने तक के लिए अनुबंध कर लिया है। कुछ अनुबंध प्रत्यक्ष तौर पर हैं तो कुछ अनुबंध अप्रत्यक्ष तौर पर किए गए हैं। इसके बदले में सरपंच को राशि भी दी गई है और दी जा रही है। इसी वजह से सरपंच भी चुप्पी साधे हुए हैं। अनुबंध की आड़ में रेत की खदानों में मनमानी की जा रही है । रेत के मनमानी कारोबार को रोकने में प्रशासन की चुप्पी भी उसकी भूमिका पर सवाल उठा रही है।

*जिला पंचायत के सीईओ की तरफ उठने लगी शंका की उंगली*

रेत की अवैध बिक्री या परिवहन को लेकर ही खनिज विभाग के स्तर पर कार्रवाई की जाती है। स्टेट माइनिंग कार्पोरेशन व संबंधित ग्राम पंचायत के स्तर पर रेत की बिक्री की जा रही है। इसके लिए नई रेत नीति में जिला पंचायत को अधिकार सौंपे गए हैं नई रेत नीति के तहत ग्राम पंचायतों को रेत का अधिकार दे दिया गया है । बावजूद इसके रेत का उत्खनन और परिहवन ठेकेदारों द्वारा ही किया जा रहा है। प्रत्यक्ष से लेकर अप्रत्यक्ष रूप से अनुबंध किए गए हैं। नियम कायदों को रौंदकर ठेकेदार नदियों का सीना छलनी कर रहे हैं। बारिश के मद्देनजर कई स्थानों में रेत का अवैध रूप से भंडारण भी किया गया हैं। जिला पंचायत द्वारा निगरानी न करने की वजह से रेत खदान का संचालन ठेकेदारों द्वारा किया जा रहा है जिसको लेकर चर्चा है कि सीईओ की चुप्पी अनदेखी क्यो की जर्सी है। जबकि यदि संबंधित पंचायत खदान चलाने में सक्षम नहीं है तो किसी भी नजदीकी पंचायत को संचालन करने अनुमति जिला पंचायत को देने का अधिकार है जिले के जिम्मेदार अधिकारी महज औपचारिकता पूरी करने के लिए कार्रवाई करते है अब औपचारिकता वाली कार्रवाई भी बंद कर दी गई है जिस वजह से ग्रामीणो को तिगुना दामों में रेत मिल रही है।

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