गोतरा रेत खदान के संचालक एनजीटी के नियमों पर भारी रेलवे के नियमों को ताक में रखकर गोपद से उठाया जा रहा रेत

गोतरा रेत खदान के संचालक एनजीटी के नियमों पर भारी रेलवे के नियमों को ताक में रखकर गोपद से उठाया जा रहा रेत

क्या रेलवे ट्रैक के नीचे से उठाए जा रहे रेत पर आखिर क्यों चुप है जिला प्रशासन

मध्य प्रदेश जिला सीधी जी हां हम बात कर रहे हैं सीधी जिले की जनपद पंचायत कुशमी के ग्राम पंचायत गोतरा से निकलने वाली जीवनदायिनी गोपद नदी के दिल को जंहा रेतमाफिआओं ने छलनी कर डाला वंही गोतरा खदान के संचालकों ने नियमों की अनदेखी कर रेल्वे ट्रेक से सरेआम रेत की निकासी करने में तुले हुये हैं । आपको बताते चलें जिला प्रशासन का खुला संरक्षण इन रेत माफियाओं को प्राप्त है

ग्राम पंचायत गोतरा खदान का संचालन रेल्वे पुल से संटकर जंहा किया जाता है , वंही रेल्वे की जमी से गुजर रेल्वे ट्रेक को क्रास कर रेत का निर्यात किया जाना चर्चाओं में है । एक बार रोंक लगाये जाने के बाबजूद इन माफियाओं पर कोई असर नही खनिज विभाग से जुड़े तमाम अधिकारी आखिर क्यों चुप्पी साधे हुए हैं

सूत्रों की माने तो रेत खदान गोतरा का संचालन भी अन्य खदानों की तरह बाहरी व्यक्ती द्वारा किया जा रहा है, हाँ जिले में इसकी बागडोर किसके पास है ये भी लगभग सब को पता है और तो और इस खदान को बंद भी किया जा चुका है, हाँ ये बात अलग है की खदान क्यू बंद हुई और क्यू चालू हुई ये किसी की समझ में नही आया पर वर्तमान में संचालित रेत खदान से सभी त्रस्त है एक तो गाँव के बीचो बीच से निकलने वाली सकरी सड़क में वाहनों की भीड़ वंही इनसे उड़ने वाली धूल और तो और रेलवे की जमीन पर भी इनके द्वारा दखल देते हुए अपने वाहन दिनरात दौडाए जा रहे है, इन्हे न तो नियम की परवाह है और न ही कानून की और हो भी क्यू जब नेता अपने और प्रशासन भी अपना |

गौरतलब है की आम जन को सस्ती व सुलभ रेत मुहैय्या करने साथ ही पंचायत के विकासात्मक कार्यो को निर्बाध गति से चलाने के उद्देश्य से पंचायतो को रेत खदाने आबंटित की गई थी लेकिन जनप्रतिनिधियों की नाकारी व अधिकारीयों की धनलोलुपता ने ऐसे माफियाओं को जन्म दे दिया है जिन्हें अब चाह कर भी कोई नही रोक सकता, व् इन माफियाओं द्वारा रेत से अर्जित धन द्वारा समस्त शासकीय नियम कायदों को दबा कर रख दिया गया है, इन्हे न तो शासन का डर है न ही प्रशासन का क्यूकी इनके पास गांधी जी है और गांधी जी के आगे सब सरेंडर….?

जिले में संचालित समस्त रेत खदानों में नियम कायदों को दर किनार कर रेत का कारोबार किया जा रहा है पंचायतो को आवंटित रेत खदान से पंचायत की बजाय अधिकारिओं व् माफियाओं का विकाश हो रहा है|रेत खदान के आवंटन के समय तय किये गए नियम महज कागजो तक ही सीमित रह गए, वास्तविकता के धरातल में उनका अंश मात्र भी पालन नही किया जा रहा है|चाहे निर्धारित वाहनों के बारे में हो या मजदूरों के उपयोग की बात हो या रेट की कीमत हो सब केवल कागजो में ही सीमित है| ट्रैक्टर व 407 वाहनों की जगह हईवा का उपयोग हो रहा है, मजदूरों की जगह मशीने काम कर रही है, पंचायत व् जिले से बाहार रेत का परिवहन हो रहा है, मनमानी दर पर रेत का विक्रय हो रहा है और तो और पंचायतो के बजाय बहार से आये दलाल रेत का कारोबार कर रहे है, हाँ ये अलग बात है की, जिले के जिम्मेदार अधिकारियो की आय बढी है साथ ही जो इन पर बोल सकते है या कार्यवाही कर सकते है वो भी गांधी जी के आगे नतमस्तक है सूत्रों की मानें तो आपको बताते चलें जानकारी यहां तक मिली है कि रेत खदान में जिले के अधिकारियों के लोग बैठाए गए हैं जो शाम होते ही अपने हिस्से की रकम लेकर वापस घर पहुंच जाते हैं। अगले समाचार में इस बात का खुलासा स्वतंत्र इंडिया लाइव सेवन कर सकता है किन अधिकारियों को कितने पैसे रेत खदान संचालक के द्वारा दिया जा रहा है यह वीडियो स्वतंत्र इंडिया लाइव सेवन के पास सुरक्षित है।

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