*हम तो पूँछेंगे कलम की धार से रोहित*

*हम तो पूँछेंगे कलम की धार से रोहित*

【1】 *क्या एक ही विभाग में वर्षों से जमे हुए कर्मचारी सरकारी योजनाओं का लगा रहे पलीता*?

【2】 *क्या कर्मचारियों के साथ मारपीट करना वैचारिक राजनीति का अंत है।*?

【3】 *क्या जनप्रतिनिधियों के अभाव में जिला कलेक्टर को करना पड़ रहा विकास कार्यों का ऐलान*?

मध्य प्रदेश जिला सीधी नमस्कार मैं रोहित मिश्रा अपने अति महत्वपूर्ण पेशकश हम तो पूछेंगे कलम की धार के माध्यम से आज पहला सवाल पूछ रहे हैं सीधी जिले के विभिन्न विभागों में कई बरसों से पदस्थ छोटे कर्मचारी और अधिकारियों के संबंध में मध्यप्रदेश में बदलाव हुआ सरकार बदल गई अधिकारियों के तबादले हर दिन थोक के भाव इधर से उधर किए जा रहे हैं लेकिन अगर असली रूप में देखा जाए तो स्थिति जस की तस बनी हुई है क्योंकि अधिकारी मात्र छोटे कर्मचारियों को निर्देश देते हैं वह भी बड़े मामलों में लेकिन विभाग के कई ऐसे कार्य होते हैं जिनमें अधिकारी के निर्देश की आवश्यकता नहीं होती ऐसी स्थिति में कई वर्षों से पदस्थ अधिकारी कर्मचारी एक ही सूत्र में सरकारों को चलाते हैं अधिकारी आते हैं जाते हैं उससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता जनता परेशान रहती है क्योंकि उनके रास्ते होते हैं कि चलना कहां है करुणा भवन परिवहन कार्यालय जंगल विभाग सहित कई ऐसे विभाग जहां कर्मचारी कई वर्षों से पदस्थ हैं और उनका तबादला ना तो कभी हुआ और ना ही अभी जब तबादलों की झड़ी लगी हुई है ऐसी स्थिति में भी लोगों की नजर या फिर सरकार की नजर जा पा रही है इसलिए पहले सवाल में अस्पष्ट मत यही है कि जब अधिकारियों की तबादला की जा रही है तो छोटे कर्मचारियों को भी इधर से उधर किया जाना चाहिए

【2】 *क्या कर्माचारियों के साथ मारपीट करना वैचारिक राजनीति का अंत है।?*

आजकल जनप्रतिनिधियों द्वारा कर्मचारियों के साथ लाठी डंडे से मारपीट की जा रही है हाल ही में मध्यप्रदेश के इंदौर सतना सहित कई जिलों में जनप्रतिनिधियों ने कर्मचारियों के साथ बेरहमी से मारपीट किया ऐसी स्थिति को देखने के बाद राजनीति के उद्भव के प्रणेता सुकरात प्लेटो अरस्तु मैकियावेली सहित कई दार्शनिकों के विचार और आज के राजनीतिक जो के विचार को अगर समेकित किया जाए तो ऐसा लगता है की वैचारिक राजनीति का अंत हो चुका है जनप्रतिनिधि जो सरकार चलाते हैं या फिर सरकार की निगरानी करते हैं जिनके पास सारा सिस्टम होता है कर्मचारी उनके अधीनस्थ काम करते हैं उनको कानूनी तौर पर बर्खास्त किया जा सकता है निलंबित किया जा सकता है लेकिन उनके साथ मारपीट करना कानून की अवहेलना है और उनके द्वारा ही कानून की अवहेलना किया जा रहा है जो संसद भवन या विधानसभा में बैठकर कानून बनाते हैं ऐसी स्थिति में जब कर्मचारी जनप्रतिनिधियों से असुरक्षित है तो यह कहा जा सकता है कि देश से धीरे-धीरे राजनीतिक विचार खत्म हो रहे हैं

【3】 *क्या जनप्रतिनिधियों के अभाव में जिला कलेक्टर को करना पड़ रहा है विकास कार्यों का ऐलान*?

सीधी जिले में सरकार के बदलाव के बाद लगातार विकास कार्य किए जा रहे हैं सीधी लगभग अपने नए रूप में दिखने लगी है लेकिन एक बात यह भी है कि वैधानिक तौर पर विकास कार्यों की समीक्षा एलान और योजनाओं को अमलीजामा पहनाने के साथ साथ उनका ऐलान करना जनप्रतिनिधियों का काम है केंद्र में सांसद राज्य में विधायक यह संबंधित विधानसभा का विधायक लेकिन सीधी जिले में बीते कई माह से स्पष्ट हो रहा है कि जैसे जनप्रतिनिधि विलुप्त से हो गए हम एकमात्र सांसद विधायक का कार्य जिला कलेक्टर के द्वारा किए जा रहे हैं जिला कलेक्टर के द्वारा मंच के माध्यम से जिस तरह नेताओं द्वारा ऐलान किया जाता है कि यहां केंद्रीय विद्यालय खोली जाएगी यहां से यहां तक सड़कें बनाई जाएगी ठीक उसी तरह से जनसंपर्क अधिकारी के माध्यम से योजनाओं का ऐलान किया जा रहा है और जनप्रतिनिधि विलुप्त ऐसा हो भी क्यों ना क्योंकि निर्वाचित जनप्रतिनिधि अपने कार्यों के प्रति लगातार लापरवाह है कलेक्टर पहली बार नेताओं के कार्य को जमीन पर उतार रहे हैं और एक जनप्रतिनिधि के रूप में भी प्रशासनिक मुखिया की तरह काम कर रहे हैं हालांकि विचारों की राजनीति में लंबे समय तक सीधी जिले की पृष्ठभूमि याद किया जाएगा आज बस इतना ही फिर मिलेंगे अगले सोमवार को कुछ विशेष सवालों के साथ

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