डबल सीट के चक्कर में फंस गए सिद्धारमैया! कहां से लड़ेंगे चुनाव?

डबल सीट के चक्कर में फंस गए सिद्धारमैया! कहां से लड़ेंगे चुनाव?
दरअसल सिद्धारमैया को कुछ लोगों ने आगाह किया था कि बीजेपी और जेडीएस के बीच डील के चलते चामुंडेश्वरी में उन पर हार का खतरा है.

राहुल सिंह गहरवार संस्थापक $ मैनेजिंग डायरेक्टर सीधी (म.प्र.)

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया राजनीतिक करियर के सबसे मुश्किल दौर से गुज़र रहे हैं. उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में एक सीट से चुनाव लड़ा जाए या फिर दो जगहों से. चामुंडेश्वरी से चुनाव लड़ने की उन्होंने पहले ही आधिकारिक घोषणा कर दी है. लेकिन बदामी से चुनाव लड़ने को लेकर अब भी सस्पेंस बना हुआ है. कांग्रेस में भी इसको लेकर एक मत नहीं हैं. जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी सिद्धारमैया की उम्मीदवार को लेकर कुछ भी साफ-साफ नहीं कहा है.

सिद्धारमैया का यू टर्न

गुरुवार को सिद्धारमैया ने बदामी के कांग्रेस कार्यकर्ताओं को आश्वासन दिया कि वो वहां से भी चुनाव लड़ेंगे. लेकिन कुछ देर बाद ही उन्होंने इस फैसले पर यू टर्न ले लिया. सिद्धारमैया ने मीडिया से कहा कि वो सिर्फ मैसूर जिले के चामुंडेश्वरी से चुनाव लड़ेंगे. उन्होंने शुक्रवार को चामुंडेश्वरी से अपना नामांकन भी भरा.

बदामी पर बवाल

कांग्रेस ने बदामी के लिए डॉक्टर देवराज पाटिल का नाम घोषित किया है. लेकिन पार्टी ने फिलहाल उन्हें नामांकन भरने से रोक दिया है. दरअसल पार्टी को लगता है कि सिद्धारमैया आखिरी मौके पर वहां से चुनाव लड़ सकते हैं.

बदामी के मौजूदा विधायक बीबी चिमानकट्टी ने मुख्यमंत्री को धमकी दी है कि या तो वो खुद वहां से चुनाव लड़े या फिर उन्हें टिकट दिया जाए. बीबी चिमानकट्टी नहीं चाहते हैं कि देवराज पाटिल उनकी सीट से चुनाव लड़े.

इतना ही नहीं चिमानकट्टी ने पार्टी के कुछ नेताओं को ये भी कहा है कि अगर टिकट पाटिल को दिया गया तो वो ‘आत्महत्या’ कर सकते हैं. दूसरी तरफ पाटिल ने भी कांग्रेस को धमकी दी है कि अगर सिद्धारमैया वहां से चुनाव नहीं लड़ते हैं तो टिकट सिर्फ उन्हें ही मिलनी चाहिए.

जल संसाधन मंत्री एमबी पाटिल के साथ-साथ स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने भी सिद्धारमैया को बादामी से चुनाव लड़ने का अनुरोध किया है. न्यूज़ 18 से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सिद्धारमैया के वहां से चुनाव लड़ने से पार्टी के कार्यकर्ता काफी उत्साहित होंगे जिससे कांग्रेस को बाक़ी सीटें जीतने में मदद मिलेगी.

चामुंडेश्वरी में क्यों डर रहे हैं सिद्धारमैया?
मैसूर में सिद्धारमैया के शुभचिंतक भी उन्हें बदामी से चुनाव लड़ने के लिए मना रहे हैं. दरअसल सिद्धारमैया को कुछ लोगों ने आगाह किया था कि बीजेपी और जेडीएस के बीच डील के चलते चामुंडेश्वरी में उन पर हार का खतरा है.

चामुंडेश्वरी से सिद्धारमैया पांच बार जीत चुके हैं. साल 2008 में वो वरुणा से चुनाव लड़ने पहुंच गए. लेकिन अब उन्होंने अपने बेटे के लिए वरुणा की सीट खाली कर दी है. फिलहाल चामुंडेश्वरी की सीट पर जेडीएस के जीटी देवगौड़ा का कब्जा है. देवगौड़ा ने यहां से सिद्धारमैया को हराने के लिए पूरी ताकत झौंक दी है.

राज्य में जेडीएस के प्रमुख एचडी कुमारस्वामी ने पहले से ही मुख्यमंत्री को हराने के लिए तीन दिनों के लिए चामुंडेश्वरी में प्रचार किया है. यहां बीजेपी को कमजोर पार्टी माना जाता है. कांग्रेस का दावा है कि सिद्धारमैया को हराने के लिए जेडीएस ने बीजेपी से डील की है. बीजेपी ने अभी तक यहां से अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है.

चामुंडेश्वरी में वोट का गणित

चामुंडेश्वरी में 72,000 वोक्कालिगा और 40,000 वीरशैव / लिंगायत वोट हैं. राजनीतिक विशेषज्ञों का तर्क है कि इन दो जातियों के वोट से सिद्धारामिया का पत्ता साफ हो सकता है. लेकिन स्थानीय कांग्रेस नेताओं का कहना है कि 60 फीसदी से अधिक मतदाता सिद्धारमैया के ‘अहिंदा’ (माइनॉरिटीज, बैकवर्ड क्लासेज, दलितों का कन्नड़ में शॉर्ट फॉर्म) से हैं और वे उन्हें समर्थन देंगे.

बदामी में वोट का गणित
दूसरी दरफ प्राचीन चालुक्य साम्राज्य की राजधानी बदामी एक कुरुबा वर्चस्व वाली सीट है और मुख्यमंत्री को लगता है कि वहां से जीतना बहुत आसान होगा. सिद्धारमैया कुरुबा जाति से हैं. कर्नाटक में कुल जनसंख्या का 7% कृरबा जाति के हैं.

कांग्रेस की राय
पार्टी की इटरनल सर्वे ने भी सिद्धारामिया को दो सीटों से चुनाव लड़ने का सुझाव दिया है. राज्य कांग्रेस के नेताओं के मुताबिक राहुल गांधी ने सिद्धारमिया को जल्दी फैसला करने को कहा है. नामांकन की आखिरी तारीख 24 अप्रैल है.

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को नेगेटिव पब्लिसिटी से बचने के लिए सिर्फ एक सीट से चुनाव लड़ने को कहा. बीजेपी और जेडीएस ने अभी से ही सिद्धारमिया को डरपोक कहना शरू कर दिया है.

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