‘रोटी मांगने वालों को लाठी से पिटाई यही है सबका साथ सबका विकास-सुंदर सिंह

‘रोटी मांगने वालों को लाठी से पिटाई यही है सबका साथ सबका विकास-सुंदर सिंह

मध्य प्रदेश जिला सीधी कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक है,
देश से लेकर राम जन्मभूमि और मध्य प्रदेश में भाजपा का शासन है मोदी योगी और शिव के शासनकाल और करीब 2 माह के तालाबंदी करोड़ों लोगों जिनमें मेहनतकश लोगों सहित गर्भवती महिलाएं बच्चे भूखे प्यासे पैदल ही हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर रहे हैं जो भूखे हैं रोटी के लिए तरस रहे हैं उन्हें हर जगह है पुलिस द्वारा रोटी की जगह लाठी खिला रही है जबकि आज से देश के वित्त मंत्री मैडम सीतारमण देश के अंदर जन्म लेने मतदान करने वाली और देश के विकास में रात-दिन खून पसीना बहाने वाले मेहनतकश मजदूरों को प्रवासी कह कर श्रम वीरों का अपमान कर रही हैं फिर शिवसेना और वित्त मंत्री के बयानों में क्या अंतर है इतना ही नहीं वित्त मंत्री बोल रही हैं प्रवासी मजदूरों को खाना पानी अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है जबकि न्यूज़ चैनल मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे प्रदेशों में मजदूरों को पुलिस की लाठी खाते हुए लगातार दिखाया जा रहा है भारतीय लोकतंत्र में इससे बड़ी शर्मनाक घटना और क्या हो सकती है उसकी वजह है कि हमारे राजनेता ऐ. सी कमरे में जहां आराम कर रहे हैं वहीं देश के करोड़ों देवी देवता या तो ताला बाहर से बंद करवा कर सो रहे हैं या मंदिर मस्जिद चर्च और गुरुद्वारा छोड़कर दिल्ली के मस्जिद में करो ना वायरस को पालने पहुंचने वाले धर्मगुरु के सरे के भूमिगत हो गए हैं दुनिया के साथ ही देश की प्रतिष्ठित गंभीर होती जा रही है और उसकी वजह सरकार द्वारा जल्दबाजी में लिया हुआ निर्णय है यदि देशवासियों को कोरोनावायरस के बारे में जानकारी एक हफ्ते पहले दे दी जाती उन्हें अपने घर गांव नात रिश्तेदार के यहां पहुंचने का समय दिया जाता तो आज जो स्थिति बनी हुई है वह ऐसी स्थिति आज इतना फैल गया है जिसे भूल पाना मुश्किल है उसका उदाहरण 25 जून 1975 के आपातकाल से किया जा सकता है जिसे 45 वर्ष बाद भी लोग भूल नहीं पाए हैं जबकि आपातकाल में कुछ ही बेगुनाह लोग जेल गए थे आज ऐसे लोगों के हाथों देश और राज्यों की कमान हैं उन्हीं के उद्योग धंधे पूर्णिमा के चांद जैसे चमक रहे हैं कुछ समाज विरोधी तत्व एक शासकीय सेवक से ज्यादा पेंशन प्राप्त कर रहे हैं कोरोना तो सदियों तक नहीं भुलाया जा सकता है जो आज पैदा हुआ बच्चा अपने माता पिता को देख ही नहीं पाया है जिनके भाई बहन बेटा-बेटी पैदल चलते हुए दम तोड़ दिए हैं या ट्रक बस ट्रैक्टर पलटने के कारण दम तोड़ दिए हैं आज जरूरत है शासन प्रशासन उनके अधीनस्थ कर्मचारियों अधिकारियों समाज सेवकों और खासतौर पर उन पीड़ित लोगों को साहस, धैर्य और सामने खड़े दुश्मन कोरोना से लड़ने का? जो लोग इस महामारी के शिकार हुए हैं उनके परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं

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