पूर्व वित्त विदेश एवं रक्षा मंत्री जसवंत सिंह का निधन

पूर्व वित्त विदेश एवं रक्षा मंत्री जसवंत सिंह का निधन

दिल्ली केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता जसवंत सिंह का रविवार सुबह निधन हो गया। 82 वर्षीय जसवंत सिंह पिछले छह साल से कोमा में थे।
बाड़मेर। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता जसवंत सिंह का रविवार सुबह निधन हो गया। 82 वर्षीय जसवंत सिंह पिछले छह साल से कोमा में थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उनके निधन पर दुख वक्त किया है।

8 अगस्त 2014 को पूर्व वित्त, विदेश और रक्षामंत्री जसवंत सिंह घर में गिर गए थे जिसके बाद से वे कोमा में थे। लोकसभा चुनाव 2014 में भाजपा ने जसवंत सिंह की इच्छा के बावजूद बाड़मेर-जैसलमेर के संसदीय क्षेत्र से टिकट नहीं दिया था।

उनकी जगह कर्नल सोनाराम चौधरी को कांग्रेस से भाजपा में शामिल कर टिकट दिया गया। इससे नाराज जसवंत सिंह ने भाजपा छोड़ दी और निर्दलीय चुनाव लड़ा। वे 2014 का लोकसभा चुनाव हारकर दिल्ली लौट गए और 8 अगस्त की रात को दिल्ली में अपने आवास में फर्श पर गिरने के बाद से कोमा में थे।

कोमा में जाने के बाद वो कभी-कभी आंख खोलते थे लेकिन बोल नहीं पाते थे। विदित रहे कि जसवंत सिंह के कोमा में जाने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और केन्द्रीय मंत्री सुषमा स्वराज का निधन हुआ, लेकिन इस हालात में उनको कोई खबर नहीं रही। उनके भाई घनश्याम सिंह का निधन भी हुआ।

जसवंत सिंह का राजनीतिक सफर
– मई 16, 1996 से जून 1, 1996 के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में रहे वित्त मंत्री रहे।

– 5 दिसम्बर 1998 से 1 जुलाई 2002 के दौरान वाजपेयी सरकार में विदेश मंत्री रहे।

– 2002 में यशवंत सिन्हा की जगह एक बार फिर वित्त मंत्री बने और इस पद पर मई 2004 तक रहे।

– वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने बाजार-हितकारी सुधारों को बढ़ावा दिया। वे स्वयं को उदारवादी नेता मानते थे।

– 15वीं लोकसभा में दार्जिलिंग संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने गए।

– 1960 के दशक में वे भारतीय सेना में अधिकारी रहे। पंद्रह साल की उम्र में ही वे भारतीय सेना में शामिल हुए थे।

– मेयो कॉलेज और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कवास्ला के छात्र रह चुके हैं।

– 2001 में उन्हें ‘सर्वश्रेष्ठ सांसद’ का सम्मान मिला।

– 19 अगस्त 2009 को भारत विभाजन पर उनकी किताब जिन्ना-इंडिया, पार्टिशन, इंडेपेंडेंस में नेहरू-पटेल की आलोचना और जिन्ना की प्रशंसा के लिए उन्हें उनके राजनीतिक दल भाजपा से निष्कासित कर दिया गया और फिर वापस लिया गया।

– 2014 के लोकसभा चुनाव में राजस्थान के बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा संसदीय क्षेत्र से भाजपा की ओर से टिकट नहीं दिए जाने के विरोध में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। इस बगावत के लिए उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया।

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